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अक्रूर -

  • यदुकुलान्तर्गत सात्वतवंशीय शफ़ल्कके पुत्र, जिन्हें दानपति भी कहते हैं । ये वृष्णि वीरोंके सेनापति थे ( आदि० २२० । २९ )।
  • (इनकी माताका नाम 'गान्दिनी' और पत्नीका नाम 'सुतनु' था। वह आहूककी पुत्री थी -पुराणान्तरसे) द्रौपदीके स्वयंवरमें इनका आगमन ( आदि० १८४ । १० )।
  • सुभद्रा हरणके समय रैवतक पर्वतपर होनेवाले उत्सवमें ये भी थे ( आदि० २९८ । १० )।
  • सुभद्राके लिये श्रीकृष्णके साथ दहेज लेकर गये थे ( आदि० २२० । २९ )।
  • उपलव्य नगरमें अभिमन्युके विवाहके अवसरपर आये थे ( विराट० ७२ । २२ )।
  • अक्रूर और आहूकमें बड़ा वैर था और वे दोनों श्रीकृष्णको अपने विरोधीका पक्षपाती समझकर उनसे मन-ही-मन असंतुष्ट रहते थे । इससे श्रीकृष्णको बड़ी चिन्ता थी ( शान्ति० ८१ । ९-११ )।
  • सभापर्वके ४ ; वनपर्वके १८ ; मोसलपर्वके ६ तथा स्वर्गारोहणपर्वके ५ वें अध्यायोंमें भी इनका नाम आया है । ये विश्वेदेवामें मिल गये थे ।

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