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कैटभ

  • (१) एक महान् असुर, जो मधुका भाई एवं सहचर था । इन दोनोंकी उत्पत्ति भगवान् विष्णुके कानोंकी मैलसे हुई थी । भगवान्ने मिट्टीसे इनकी आकृति बनायी थी । इनको मूर्तिमें वायुके प्रविष्ट हो जानेसे ये सप्राण हो गये थे । इसके साथका मधु और इसका कैटभ नाम होनेका कारण (सभा० ३८ । दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ७८३) ।
  • भगवान् विष्णुद्वारा इन दोनोंका वध (सभा० ३८ । पृष्ठ ७८४) ।
  • मधुसहित कैटभकी उत्पत्तिका वर्णन; नाभिकमलपर भगवत्प्रेरणासे जलकी दो बूँदें पड़ी थीं, जो रजोगुण और तमोगुणकी प्रतीक थीं । भगवान्ने उन दोनों बूँदोंकी ओर देखा । एक मधु और दूसरी बूँद कैटभके आकारमें परिणत हुई (शान्ति० ३४८ । २९-३६) ।
  • भगवान् हयग्रीवद्वारा इनका वध (शान्ति० ३४० । ६९-७०) ।
  • (२) एक दानव, जो कभी इस पृथ्वीका अधिपति था; किंतु इसे छोड़कर चल पड़ा था (भीष्म० १८ । ५३) ।

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