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कैलास

  • एक पर्वत, जो कुबेर तथा भगवान् शिवका निवास-स्थान है (वन० १०५ । १६-१७; वन० १४१ । ११-१२) ।
  • यहाँ श्वेतकिने भगवान् शिवकी प्रसन्नताके लिये उग्र तपस्या की (आदि० २२२ । ३६-४०) ।
  • कैलासके उत्तर मैनाक है, जहाँ मयासुरने मणिमय भाण्ड तैयार करके रखा था (सभा० ३ । २-९) ।
  • कैलास पर्वत कुबेरके सभाभवनमें जाकर उनकी उपासना करता है (सभा० १० । ३१-३६) ।
  • व्यासजी कैलासपर गये थे (सभा० ४५ । १७) ।
  • राजा सगरने भी अपनी दोनों पत्नियोंके साथ जाकर कैलासपर तपस्या की थी (वन० १०६ । १०) ।
  • भगीरथने भगवान् शिवकी प्रसन्नताके लिये कैलासपर जाकर तप किया (वन० १०८ । २६) ।
  • कैलासपर्वत छः योजन ऊँचा है । वहाँ सब देवता आया करते हैं । उसके पास ही विशाला नामकी एक नदी है (बदरिकाश्रम) ।
  • कुबेरभवनरूप कैलासपर असंख्य यक्ष, राक्षस, किन्नर, सुपर्ण, नाग और गन्धर्व रहते हैं (वन० १४१ । ११-१२) ।
  • कैलास-शिखरके निकट ही कुबेरकी नलिनी है, जहाँ भीमसेन गये थे (वन० १५३ । १-२) ।
  • अन्य पाण्डवोंका भी वहाँ गमन (वन० १५५ । २३) ।
  • कैलासपर्वतपर कुबेरको यक्ष और राक्षसोंका राजा बनाया गया था (उद्योग० १११ । ११) ।
  • अष्टावक्रजी कैलास होते हुए उत्तर दिशाकी ओर गये । वहाँ कुबेरभवनमें उनका सत्कार हुआ था (अनु० ११ । ३१) ।
  • सुरभिने देव-गन्धर्व-सेवित कैलासके सुरम्य शिखरपर तपस्या की (अनु० ८३ । २८-३०) ।

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