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गय

  • (१) 'आयु'के द्वारा स्वर्भानुकी कन्या प्रभाके गर्भसे उत्पन्न चतुर्थ पुत्र । पुरूरवाके पौत्र (आदि० ७५ । २५) ।
  • (२) एक प्राचीन राजा, जो अमूर्तरयाके पुत्र और राजर्षियोंमें श्रेष्ठ थे । शमठद्वारा इनके यशका वर्णन (वन० ९५ । १८—२९) ।
  • ये यमराजकी सभामें विराजमान होते हैं (सभा० ८ । १८) ।
  • इन्होंने सम्पूर्ण तीर्थोंकी यात्रा की और वहाँके पावन जलके स्पर्श तथा महात्माओंके दर्शनसे प्रचुर धन एवं यश लाभ किये थे (वन० ९४ । १८-१९) ।
  • इनके यशकी प्रशंसा (वन० १२१ । ३—१३) ।
  • विराट-नगरमें गोहरणके समय अर्जुन और कृपाचार्यका युद्ध देखनेके लिये ये इन्द्र- के विमानपर बैठकर आये थे (विराट० ५४ । ९-१०) ।
  • इन्होंने हस्तिनापुर जाते हुए श्रीकृष्णकी मार्गमें परिक्रमा की थी (उद्योग० ६३ । २७) ।
  • इनपर मान्धाताकी विजय (द्रोण० ६२ । १०) ।
  • दृषद्वतीको समझाते हुए नारदजीद्वारा इनके यज्ञका वर्णन (द्रोण० ६६ अध्याय) ।
  • इन्होंने गयामें यज्ञ किया । इनके यज्ञमें आयी हुई सरस्वतीका नाम 'विशाला' है (शल्य० ३८ । २०-२१) ।
  • श्रीकृष्णद्वारा इनके यज्ञका वर्णन (शान्ति० २९ । १११—११२) ।
  • इनके द्वारा ब्राह्मणको पृथ्वीदान (शान्ति० २३४ । २६) ।
  • इन्होंने मांस-भक्षणका निषेध किया था (अनु० ११५ । ५९) ।
  • (३) एक परम पुण्यमय श्रेष्ठ पर्वत, जो राजा गयद्वारा सम्मानित हुआ है । वहीं देवर्षिसेवित कल्याणमय ब्रह्मसरोवर है । गयामें जाकर श्राद्ध करनेसे मनुष्यकी बीस पीढ़ियोंका उद्धार हो जाता है (वन० ८७ । ८-१०) ।
  • (४) एक देश, जिसके भीतर गय पर्वत और गया तीर्थ है । इस देशके लोग राजा युधिष्ठिरके यहाँ भेंट लेकर आये थे (सभा० ५२ । १६) ।

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