← अनुक्रमणिका

चित्राङ्गदा

  • (१) मणिपुरनरेश चित्रवाहनकी पुत्री ( आदि० २१४ । १५ ) ।
  • नगरमें विचरण करती हुई इस राजकुमारीपर अर्जुनकी दृष्टि पड़ी और वे इसे चाहने लगे ( आदि० २१४ । १७ ) ।
  • चित्राङ्गदाके पितासे उनका इसे अपनी पत्नी बनानेके लिये माँगना ( आदि० २१४ । १७ ) ।
  • अर्जुनद्वारा इसका पाणिग्रहण ( आदि० २१४ । १६ ) ।
  • इसके गर्भसे बभ्रुवाहन नामक एक पुत्रका जन्म और अर्जुनका चित्राङ्गदाको हृदयसे लगाकर वहाँसे प्रस्थित हो जाना ( आदि० २१४ । २७ ) ।
  • इससे मिलनेके लिये अर्जुनका पुनः मणिपुरमें आगमन ( आदि० २१६ । २३ ) ।
  • मणिपुरसे जाते समय इसको अर्जुनका आश्वासन तथा राजसूय-यज्ञमें आनेका आदेश ( आदि० २१६ । २६–३४ ) ।
  • बभ्रुवाहन और अर्जुनके युद्धमें दोनोंके धराशायी होनेपर
  • इसका संतप्त हृदयसे समराङ्गणमें आना और पतिदेवकी दशाका निरीक्षण ( आश्व० ७९ । ३०–३१ ) ।
  • पति-वियोगके शोकसे संतप्त हो मूर्च्छित होकर गिरना, कुछ देर बाद होशमें आनेपर उलूपीको सामने खड़ी देखना और उसे उपालम्भ देकर उससे अर्जुनके प्राण बचानेका अनुरोध करना ( आश्व० ८० । २–७ ) ।
  • पतिके निकट जाकर इसका विलाप करना ( आश्व० ८० । ८–११ ) ।
  • पुनः उलूपीसे पतिको जिलानेके लिये अनुरोध करना ( आश्व० ८० । १३–१७ ) ।
  • आमरण उपवासका संकल्प लेकर बैठना ( आश्व० ८० । १८ ) ।
  • चित्राङ्गदाका उलूपी तथा बभ्रुवाहनके साथ हस्तिनापुरमें जाना ( आश्व० ८० । २६ ) ।
  • इसका कुन्ती और द्रौपदीके चरणोंका स्पर्श करना और सुभद्रा आदिसे मिलना ( आश्व० ८१ । २–३ ) ।
  • कुन्ती, द्रौपदी और सुभद्रा आदिका चित्राङ्गदाके लिये विविध रत्नोंकी भेंट देना ( आश्व० ८८ । ३–४ ) ।
  • इसका दासीकी भाँति सत्यवतीकी सेवामें संलग्न होना ( आश्व० ९१ । २३–२४ ) ।
  • वनमें जाते हुए धृतराष्ट्र और गान्धारीके साथ कुरुकुलकी अन्य स्त्रियोंसहित चित्राङ्गदाका भी घरसे बाहर निकलना और रोना ( आश्व० ९५ । १० ) ।
  • संन्यास आश्रमवासी मुनिवरोंको कुरुकुलकी स्त्रियोंका परिचय देते समय चित्राङ्गदाकी अङ्गकान्तिको नूतन मधूकपुष्पकी भाँति गौर बताना ( आश्व० ९५ । ११ ) ।
  • पाण्डवोंके महाप्रस्थानके पश्चात् इसका 'मणिपुर' नामक नगरको जाना ( महाप्रस्थान० १ । १८ ) ।
  • (२) एक अप्सरा, जिसने अष्टावक्रके सम्मानार्थ कुबेरकी सभामें नृत्य किया था ( अनु० ११ । ४४ ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in