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जमदग्नि

  • एक ब्रह्मर्षि, जो सत्यवती और भृच्वीक ऋषिके पुत्र, और्वके पौत्र तथा महर्षि च्यवनके प्रपौत्र थे; ये
  • भृच्वीकके सौ पुत्रोंमें बड़े थे । इनके भी चार पुत्र थे, जिनमें सबसे छोटे परशुरामजी थे ( आदि० ६६ । ४५-४९ ) ।
  • जमदग्निजी अर्जुनके जन्मोत्सवमें पधारे थे ( आदि० १२२ । ५१ ) ।
  • ये ब्रह्माजीकी सभामें विराजते हैं ( सभा० ११ । २२ ) ।
  • इनका सत्यवतीके गर्भसे जन्म ( वन० ११५ । ५३ ) ।
  • इनकी राजा प्रसेनजित्से रेणुकाकी माँग और उसके साथ विवाह ( वन० ११६ । २ ) ।
  • इनको अपनी पत्नी रेणुकाके गर्भसे पाँच पुत्रोंकी प्राप्ति ( वन० ११६ । ४ ) ।
  • इनका रेणुकाका वध करनेके लिये पुत्रोंको आदेश ( वन० ११६ । ११ ) ।
  • माताका वध कर देनेपर परशुरामको इनका वरदान ( वन० ११६ । १८ ) ।
  • कार्तवीर्यके पुत्रोंद्वारा इनका वध ( वन० ११६ । २८; शान्ति० ४९ । १० ) ।
  • द्रोणाचार्यके पास आकर इनका उनसे युद्ध बंद करनेको कहना ( द्रोण० १९० । ३५-४० ) ।
  • इनके जन्मका प्रसंग ( शान्ति० ४९ । २९ ) ।
  • इनके परशुरामका जन्म ( शान्ति० ४९ । ३१-३२ ) ।
  • इनका वृषादर्मिसे प्रतिग्रहके दोष बताना ( अनु० ९३ । ४४ ) ।
  • अरुन्धतीसे अपने मोटे न होनेका कारण बताना ( अनु० ९३ । ४४ ) ।
  • यातुधानीसे अपने नामकी व्याख्या बताना ( अनु० ९३ । ४४ ) ।
  • मृणालकी चोरीके विषयमें शपथ खाना ( अनु० ९३ । १२०-१२१ ) ।
  • सत्यवतीके कमलोंकी चोरी होनेपर शपथ खाना ( अनु० ९४ । २४ ) ।
  • रेणुकाके पैर और मस्तकके संतप्त होनेसे सूर्यपर कोप करना ( अनु० ९५ । १८ ) ।
  • इनका शरणागत सूर्यको अभयदान देना ( अनु० ९६ । ८-१२ ) ।
  • इनके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन ( अनु० १२० । १०-११ ) ।
  • ये उत्तर दिशाके ऋषि हैं ( अनु० १२१ । ४४ ) ।
  • जमदग्निका क्रोधपर विजय ( आश्व० १२ । ४१-४६ ) ।

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