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तिलोत्तमा

  • (१) एक अप्सरा, जो कश्यपकी 'प्राधा' नामवाली पत्नीसे उत्पन्न हुई थी ( आदि० ६५ । ४३ ) ।
  • अर्जुनके जन्म-समयमें पदार्पण करके इसने वहाँ नृत्य किया था ( आदि० १२२ । ६२ ) ।
  • ब्रह्माके आदेशसे विश्वकर्मा-द्वारा तीनों लोकोंके दर्शनीय पदार्थोंके सारतत्त्व तथा रत्न-राशिसे इसका निर्माण ( आदि० २१० । १६—१९ ) ।
  • इसका तिलोत्तमा नाम होनेका कारण ( आदि० २१० । १८ ) ।
  • इसके रूपसे मोहित होकर भगवान् शिवका चतुर्मुख और इन्द्रका सहस्रनेत्र होना ( आदि० २१० । २८ ) ।
  • इसको अपनी पत्नी बनानेके लिये मुण्ड और उप-मुण्डका परस्पर गदायुद्ध करके एक-दूसरेके हाथसे मारा जाना ( आदि० २११ । १९ ) ।
  • इसको ब्रह्माद्वारा त्रिभुवनमें अव्याहत गतिका वरदान ( आदि० २११ । २२ ) ।
  • इसके नामकी निरुक्ति ( अनु० १४१ । १ ) ।

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