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त्रिगर्त

  • (१) एक जनपद ( भीष्म० ५१ । ७ ) ।
  • वहाँके निवासी और राजा । एकचक्रानगरीकी ओर जाते हुए पाण्डव लोग इस देशसे होकर निकले थे ( आदि० १५५ । २ ) ।
  • अर्जुनने उत्तर दिग्विजयके समय इस देशको जीता था । यहाँके नरेश कुन्तीनन्दन अर्जुनकी शरणमें आये थे ( सभा० २७ । १८ ) ।
  • नकुलने भी अपनी दिग्विजययात्रामें इस देशको जीता था ( सभा० ३२ । ७ ) ।
  • ये लोग युधिष्ठिरके लिये भेंट लाये थे ( सभा० ५२ । १४ ) ।
  • एक त्रिगर्तदेशीय वीरने रथके घोड़ोंको मार डाला, फिर युधिष्ठिर-द्वारा वह स्वयं भी मारा गया ( वन० २७१ । १९-२२ ) ।
  • युधिष्ठिरने विवश होकर सुशर्माका वध किया ( वन० २७१ । २८ ) ।
  • अर्जुनने त्रिगर्तोंका संहार किया ( वन० २७१ । २८ ) ।
  • त्रिगर्त-देशीय योद्धाओं तथा त्रिगर्तराज सुशर्माद्वारा विराटके राज्यपर आक्रमण और उनकी गौओंका अपहरण ( विराट० ३० अध्याय ) ।
  • विराटके साथ मत्स्यदेशीय वीरोंका युद्ध ( विराट० ३२ अध्याय ) ।
  • त्रिगर्तराज सुशर्माका विराटको पकड़कर ले जाना, भीमद्वारा सुशर्माका निग्रह और युधिष्ठिरका अनुग्रह करके उसे छोड़ देना ( विराट० ३३ अध्याय ) ।
  • पाँच त्रिगर्तोंके साथ युद्ध करनेका काम पाँचों द्रौपदी-पुत्रोंको सौंपा गया ( उद्योग० १६४ । ८)।
  • त्रिगर्तराज पाँचों उदार रथी भाई थे, इनमें प्रधान सत्यरथ था ( उद्योग० १६६ । १-११ ) ।
  • ये भीष्मनिर्मित गरुड़व्यूहके मस्तकस्थानपर खड़े किये गये थे ( भीष्म० ५६ अध्याय ) ।
  • अर्जुन और अभिमन्युपर त्रिगर्तोंने धावा किया था ( भीष्म० ६१ अध्याय ) ।
  • नकुलके साथ इनका युद्ध ( भीष्म० ७२ अध्याय ) ।
  • अर्जुनने इनपर वायव्यास्त्र छोड़ा था ( भीष्म० १०२ अध्याय ) ।
  • पहले कर्णने इनको परास्त किया था ( द्रोण० ४ अध्याय; कर्ण० ८ अध्याय ) ।
  • श्रीकृष्णने भी इनपर विजय पायी थी ( द्रोण० ११ अध्याय ) ।
  • सत्यरथ आदि पाँचों भाइयों ने यह प्रतिज्ञा की थी कि 'या तो अर्जुनको मारेंगे या मर जायँगे' इसीलिये ये संशप्तक कहलाये ( द्रोण० १७ अध्याय; द्रोण० १९ अध्याय ) ।
  • परशुरामजीने भी कभी त्रिगर्तोंका संहार किया था ( द्रोण० ७० अध्याय ) ।
  • सात्यकिके साथ त्रिगर्तोंका युद्ध ( द्रोण० ७७ अध्याय ) ।
  • युधिष्ठिरके द्वारा त्रिगर्तोंका वध ( द्रोण० १७७ अध्याय ) ।
  • त्रिगर्तोंने अर्जुन और श्रीकृष्णपर धावा किया ( शल्य० २७ अध्याय ) ।
  • अश्वमेधयज्ञके अश्वकी रक्षाके लिये गये हुए अर्जुनद्वारा इन सबकी पराजय ( अश्व० ७४ अध्याय ) ।
  • (२) त्रिगर्त-नामधारी एक राजा, जो यमकी सभामें विराजत है ( सभा० ८ । ३० ) ।

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