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त्वष्टा

  • बारह आदित्योंमेंसे एक । कश्यपके द्वारा अदितिके गर्भसे उत्पन्न ( आदि० ६५ । १६ ) ।
  • खाण्डववनके दाहके समय इन्द्रकी ओरसे युद्धके लिये इनका आगमन और अश्वके रूपमें पर्वतको उठाना ( आदि० २२९ । ३४ ) ।
  • ये इन्द्रकी सभामें विराजमान होते हैं ( सभा० ७ । १४ ) ।
  • इनकी पुत्री कशेरुका नरकासुरद्वारा अपहरण ( सभा० ३८ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ८०४-८०५ ) ।
  • प्रजापति त्वष्टा ( विश्वकर्मा ) के द्वारा वज्रका निर्माण ( वन० १०० । २५ ) ।
  • नल नामक वानर इनका पुत्र था ( वन० २८३ । ४९ ) ।
  • इन्द्र द्वारा अपने पुत्र त्रिशिराके मारे जानेसे इन्द्रपर कुपित होना और वृत्रासुरको प्रकट करना ( उद्योग० ९ । ४८ ) ।
  • त्वष्टाने अपनी तपस्यासे संतुष्ट हुए शिवजीकी कृपासे वृत्रासुर नामक पुत्र उत्पन्न किया ( द्रोण० ९१ । ५४ ) ।
  • इनके द्वारा स्कन्दको चक्र और अनुचक्र नामक दो पार्षद प्रदान ( शल्य० ४५ । ४० ) ।

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