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दम

  • ( १ ) विदर्भनरेश भीमके पुत्र और दमयन्तीके भाई ( वन० ५३ । १९ ) ।
  • ( २ ) एक महर्षि, जो अन्य महर्षियोंके साथ भीष्मजीको देखनेके लिये आये और कथा-वार्ता सुनाकर अन्तर्धान हो गये ( अनु० २६ । १४-१३ ) ।
  • जो महर्षि दमनके तीन भाई थे—दम, दान्त और दमन ( वन० ५३ । १९ ) ।
  • इनके प्रति प्रमदवनमें हंसद्वारा नलके गुणोंका वर्णन ( वन० ५३ । २७—३० ) ।
  • इनका देवदूत बनकर आये हुए नलसे वार्तालाप, उनका परिचय पूछना और महलके भीतर उनका आना कैसे सम्भव हुआ, यह जिज्ञासा प्रकट करना ( वन० ५५ । २०—२९ ) ।
  • नलके मुखसे देवताओंके वरणका प्रस्ताव सुनकर दमयन्तीका हँसकर नलको अपना पाणिग्रहण करनेके लिये प्रेरित करना और उनके अस्वीकार करनेकी दशामें प्राण त्याग देनेका निश्चय प्रकट करना ( वन० ५६ । १—४ ) ।
  • पुनः नलके द्वारा देवताओंके ही वरण करनेका अनुरोध होनेपर शोकाश्रु बहाती हुई दमयन्तीका देवताओंको नमस्कार करके नलको ही वरण करनेकी बात घोषित करना और स्वयंवर-सभामें देवताओंके समक्ष उन्हींको अपना पति चुननेका निश्चय बताना ( वन० ५६ । १४—२१ ) ।
  • दमयन्तीका स्वयंवर-सभामें आगमन ( वन० ५७ । ८ ) ।
  • स्वयंवर-सभामें नलके रूपमें पाँच व्यक्तियोंको देखकर निष्प्रभता न होनेसे दमयन्तीका देवताओंकी शरणमें जाना और राजा नलकी प्राप्ति करानेके लिये उनसे प्रार्थना करना ( वन० ५७ । ८—२१ ) ।
  • देवताओंकी कृपासे दमयन्तीमें देव-सूचक लक्षणोंके निवास करना ( वन० ५७ । २४—२८ ) ।
  • इनके द्वारा पतिरूपमें नलका वरण ( वन० ५७ । २७—२८ ) ।
  • नलका इनमें अनन्य अनुराग बनाये रखनेका विश्वास दिलाना तथा दमयन्तीद्वारा नलका अभिनन्दन होना ( वन० ५७ । ३१—३३ ) ।
  • नलके साथ दमयन्तीका विवाह; नव-दम्पतिका विहार और दमयन्तीके गर्भसे इन्द्रसेन तथा इन्द्रसेनाका जन्म ( वन० ५७ । ४०—४६ ) ।
  • इनका राजा नलको जुएसे रोकनेका प्रयास ( वन० ६० । ५—७ ) ।
  • पराजयकी सम्भावना होनेपर इनका कुमार-कुमारियोंको वाग्भेषद्वारा पिताके यहाँ

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