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अपान्तरतमा –

  • श्री नारायणके 'ओऽ' शब्दके उच्चारणसे प्रकट हुए एक महात्मा पुरुष । भगवान्‌की वाक् या सरस्वतीसे प्रादुर्भूत होनेके कारण इनका नाम सारस्वत हुआ । ये ही अपान्तरतमाके नामसे विख्यात हुए (शान्ति० ३४९।३८-३९ )।
  • ये त्रिकालज्ञ थे । इन्हें वेदोंकी व्याख्याके लिये भगवान्‌ने ऋक्-साम आदि श्रुतियोंके संग्रहका 1 आदेश दिया (शान्ति० ३४९।४०-४३ )।
  • स्वायंभुव मन्वन्तरमें इनके द्वारा वेदोंका विभाग हुआ, जिससे प्रसन्न होकर भगवान्‌ने उन्हें सभी मन्त्रोंमें धर्मप्रवर्तक होनेका आशीर्वाद दिया तथा भविष्यमें वसिष्ठवंशी पराशरके ज्ञानवान्, तपोबलसम्पन्न पुत्ररूपमें अवतीर्ण होनेकी बात बतलायी (शान्ति० ३४९।४२-५९ )।

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