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दिवोदास

  • ( आदि० १४ । २४ ) ।
  • (२) एक राजा, जो दम्भो-द्भवनाका पुत्र था । इसका पुत्र महर्षि गौतमद्वारा परशुरामके क्षत्रियसंहारसे बचाया और सुरक्षित रखा गया था ( शान्ति० ४९ । ८० ) ।
  • ये काशी जनपदके राजा तथा सुदेव अथवा भीमसेनके पुत्र थे । इनका गालवको दो सौ श्यामकर्ण घोड़े शुल्कमें देकर ययातिकन्या माधवीको एक पुत्रकी उत्पत्तिके लिये अपनी पत्नी बनाना ( उद्योग० ११७ । १-७ ) ।
  • पुत्रोत्पत्तिके बाद पुनः गालवको माधवी वापस देना ( उद्योग० ११७ । ८-२१ ) ।
  • ये यमसभामें रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । १२ ) ।
  • ये शत्रुओंके यहाँसे अभिष्ट धन और उसकी सामग्री भी हर लेनेके कारण तिरस्कारको प्राप्त हुए ( शान्ति० ९६ । २१ ) ।
  • इन्होंने इन्द्रकी आशासे वाराणसी नगरी बसायी थी ( अनु० ३० । १९ ) ।
  • ये अपने शत्रु हैहय-राजकुमारोंसे एक सहस्र दिनोंतक युद्ध करके सेना और वाहनोंके मारे जानेपर भाग निकले और भरद्वाजकी शरणमें गये, वहाँ मुनिने पुत्रेष्टि-यज्ञ करवाया, जिससे इन्हें प्रतर्दन नामक पुत्रकी प्राप्ति हुई ( अनु० ३० । २०-३० ) ।
  • दिवोदासने अपने पुत्र प्रतर्दनको युवराज बनाकर उसे वीतहव्यके पुत्रोंका वध करनेके लिये भेजा था ( अनु० ३० । ३१-३७ ) ।

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