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दुःशला

  • धृतराष्ट्र और गान्धारीकी पुत्री तथा दुर्योधन आदि सौ भाइयोंकी बहिन ( आदि० ६७ । १०५ ) ।
  • सिंधुराज जयद्रथकी पत्नी ( आदि० ६७ । १०९ ) ।
  • इसके जन्मकी कथा ( आदि० ११५ अध्याय ) ।
  • पिताद्वारा जयद्रथके साथ इसका विवाह ( आदि० ११६ । १८ ) ।
  • दुःशलाका विचार करके युधिष्ठिरने जयद्रथका वध न करनेकी आज्ञा दी थी ( वन० २७१ । ४३ ) ।
  • अश्वमेधीय अश्वकी रक्षाके लिये त्रिगर्तदेशमें गये हुए अर्जुनके द्वारा
  • त्रिगर्तवीरोंको कष्ट पाते देख दुःशलाका युद्ध बंद करानेके लिये रणभूमिमें अपने शिशु पौत्र सुरथकुमारको लेकर अर्जुनके पूछनेपर उनसे सुरथकी मृत्युका हाल बताना, विलाप करना और पार्थसे शान्ति एवं कृपाकी याचना करना ( आश्व० ७८ । २२-४१ ) ।
  • दुःशलाका दुर्योधनकी प्रसन्नताके लिये उसके बालक पौत्रको सिंधुदेशके राज्यपर अभिषिक्त करना ( आश्व० ८२ । १५ ) ।

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