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नर

  • (१) एक भगवत्स्वरूप देवता, जो भगवान् नारायणके सखा हैं और पाण्डुपुत्र अर्जुनको जिनका अवतार बताया गया है ( आदि० १, प्रथम श्लोक मङ्गलाचरण ) ।
  • दैत्योंको अमृतसे वञ्चित कर जब देवताओंको अमृत पिलाया गया, उस समय होनेवाले देवासुर-संग्राममें नारायणसहित भगवान् नरने देवपक्षकी ओरसे आकर अपने दिव्य धनुषसे असुरोंका संहार किया था । उस महाभयङ्कर संग्राममें भगवान् नरने उत्तम सुवर्णभूषित बाणोंद्वारा पर्वत-शिखरोंको विदीर्ण और आकाशमार्गको आच्छादित कर दिया । अनन्ततोगत्वा वह अमृतकी निधि किरीटधारी भगवान् नरको रक्षाके लिये सौंप दी गयी ( आदि० १११ । १९-२१ ) ।
  • द्रौपदीने अपनी लाज बचानेके लिये कौरव-सभामें भगवान् श्रीकृष्ण और नरको पुकारा था ( सभा० ६८ । ४६ ) ।
  • ये एक प्राचीन ऋषि हैं । इन्होंने बदरिकाश्रममें अनेक सहस्र वर्षोंतक तप किया है ( वन० ४० । १ ) ।
  • इनके अवतारका वर्णन ( वन० ४० । १० ) ।
  • जो बदरिकाश्रममें भगवान् नारायणके साथ रहकर तपस्या करते हैं, वे देवेश्वर नर ही अर्जुन हैं ( वन० २७२ । २९ ) ।
  • इनके द्वारा दम्भोद्भवकी पराजय और पराजित हुए दम्भोद्भवको इनका उपदेश ( उद्योग० १६ । ३४-३८ ) ।
  • ग्रीवासे प्राणोंका निष्क्रमण होनेपर मनुष्य मुनियोंमें श्रेष्ठ नरका सान्निध्य प्राप्त करता है ( शान्ति० ३१० । ५ ) ।
  • स्वायम्भुव मन्वन्तरके सत्ययुगमें प्रकट हुए भगवान् वासुदेवके चार अवतारोंमें एक भगवान् नर हैं, जो अपने भाई नारायणके साथ बदरिकाश्रममें जाकर एक सुवर्णमय रथपर आसीन हो तपस्या करते हैं ( शान्ति० ३३४ । ९-१० ) ।
  • नारद और नर-नारायणका संवाद ( शान्ति० ३३४ । १३-४५ ) ।
  • भगवान् शङ्करने जो प्रज्वलित त्रिशूल चलाया था; वह दक्ष-यज्ञका विध्वंस करके भगवान् नारायणकी छातीमें आ लगा । तब नारायणने हुंकार किया और वह त्रिशूल लौटकर रुद्रके हाथमें आ पहुँचा । तब रुद्रने नर और नारायणपर आक्रमण किया । नारायणने अपने हाथसे रुद्रका गला दबा दिया; अतः वे नीलकण्ठ हो गये । इसके बाद नरने उनपर सींक चलायी । रुद्रने उसे खण्डित कर दिया । वह परशु बनकर चली अतः वे 'खण्डपरशु' कहलाये ( शान्ति० ३४२ । ११०-११७ ) ।
  • श्वेतद्वीपसे लौटे हुए नारदके साथ श्रीनर-नारायणकी बातचीत ( शान्ति० ३४३ अध्याय ) ।
  • (२) एक गन्धर्व, जो कुबेरकी सभामें रहकर धनाध्यक्षकी उपासना करते हैं ( सभा० १० । १४ ) ।
  • (३) एक दक्षिण भारतीय जनपद ( भीष्म० ९ । ६० ) ।
  • (४) एक प्राचीन नरेश, जिन्होंने जीवनमें कभी मांस नहीं खाया था ( अनु० ११५ । ६४ ) ।

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