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नरक

  • ( १ ) दनुका एक पुत्र, जो प्रसिद्ध दानवकुलका प्रवर्तक हुआ ( आदि० ६५ । २८ ) ।
  • यह वरुणकी सभामें रहकर उनकी उपासना करता है ( सभा० १० । १२ ) ।
  • इसे इन्द्रने परास्त किया था ( वन० १६८ । ८१ ) ।
  • ( २ ) एक जनपद, जहाँके शासक राजा भगदत्त थे ( सभा० १७ । १४ ) ।
  • ( ३ ) ( नरकासुर ) एक असुर जो पृथ्वीका पुत्र होनेके कारण भौम या भौमासुरके नामसे विख्यात था; यह प्राग्ज्योतिषपुरका राजा था । पृथ्वीके भीतर मूर्तिलिङ्गमय इसका निवास था ( सभा० ३१ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ८०४ ) ।
  • इसके द्वारा त्वष्टाकी पुत्री करोषकी तथा सात अप्सराओंका अपहरण ( सभा० ३८ । २९ पृष्ठ ८०५ ) ।
  • गन्धर्वों, देवताओं और मनुष्योंकी कन्याओं तथा सात अप्सराओंका अपहरण ( सभा० ३८ । २९ पृष्ठ ८०५ ) ।
  • इस तरह सोलह हजार कुमारियोंको एकत्र करके मणिपर्वत पर औदका नामक स्थानमें भौमासुरने कैद कर रक्खा था । मुरके दस पुत्र तथा प्रधान-प्रधान राक्षस उस अन्तःपुरकी रक्षा करते थे । नरकासुरके चार राज्यपाल थे—इयग्रीव, निशुम्भ, पञ्चजन तथा मुर ( सभा० ३८ । २९ पृष्ठ ८०५ ) ।
  • इसने देवमाता अदितिके कुण्डलोंका भी अपहरण किया था । इसने राजाकी सीमापर मुर द्वारा बनाये हुए छः हजार पाश लगाये गये थे, जिनके किनारोंके भागोंमें छुरे लगे थे । श्रीकृष्णने इन पाशोंको काटकर और मुरको मार राज्यकी सीमामें प्रवेश किया था । इसके बाद बड़े-बड़े पर्वतोंके चट्टानोंके ढेरसे एक बाड़-सी लगायी गयी थी । इस घेरेका रक्षक निशुम्भ था । इसे भी मारकर श्रीकृष्ण आगे बढ़े थे । औदकके अन्तर्गत लोहित गङ्गाके बीच विरुपाक्ष तथा पञ्चजन नामसे प्रसिद्ध पाँच भयंकर राक्षस उस राज्यके रक्षक थे । उनको भी मारकर श्रीकृष्णको आगे जाना पड़ा । इसके बाद प्राग्ज्योतिषपुर नामक नगर आता था । वहाँ श्रीकृष्णको दैत्योंके साथ विकट युद्ध करना पड़ा । दैत्यासुर-संग्रामका दृश्य छा गया । इस तरह आठ लाख दानवोंको मारकर भगवान् पाताल गुफामें गये । वहाँ नरकासुर रहता था । वहाँ जाकर श्रीकृष्णने कुछ देर युद्ध करनेके बाद चक्रसे उस असुरका मस्तक काट डाला । भगवान् श्रीकृष्णने पृथ्वीके उस पुत्रको ब्रह्मद्रोही, लोककण्टक और नराधम बताया ( सभा० ३८ । २९ पृष्ठ ८०७ ) ।
  • भगवान् विष्णुद्वारा इसके वधकी चर्चा ( वन० १४२ । २७ ) ।
  • उद्योग-पर्वमें पुनः उस प्रसङ्गका यों वर्णन है—असुरोंका प्राग्ज्योतिषपुर नामसे प्रसिद्ध एक भयंकर किला था, जो शत्रुओंके लिये अजेय था । वहाँ भूमिपुत्र महाबली नरकासुर निवास करता था । उसने देवमाता अदितिके सुन्दर मणिमय

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