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अम्बरीष –

  • ( १ ) एक प्राचीन नरेश, जो सूर्यवंशी राजा नाभागके पुत्र थे और जिन्होंने यमुनाटपर यश किया था ( आदि० १ । २२७; भीष्म० ९ । १६ तथा वन० १२९ । २ )।
  • दुर्वासाद्वारा अम्बरीषके प्रभावका स्मरण ( वन० २९३ । ३३ )।
  • संजयको समझाते हुए नारदजी-द्वारा इनके चरित्रका कथन ( द्रो० ६४ अध्याय )।
  • अम्बरीषके अधिकारमें पूर्वकालमें यह पृथ्वी थी – इसकी चर्चा ( शान्ति० ८ । ३३-३४ )।
  • इनके यज्ञका वर्णन ( शान्ति० २९ । १००-१०४ )।
  • अपने सेनापति सुदेवकी अपनेसे उत्कृष्ट गति देखकर उसके विस्मयमें इनका इन्द्रसे प्रश्न करना ( शान्ति० ९८ । ५-११ )।
  • रणयज्ञके विषयमें इन्द्रसे प्रश्न ( शान्ति० ९८ । १४ )।
  • इनके द्वारा ब्राह्मणोंको ग्यारह अर्बुद गो-दान ( शान्ति० २३४ । २३ )।
  • अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर इनका शपथ खाना ( अनु० १४ । २९ )।
  • मांस-भक्षणनिषेधसे परावर-तत्वका ज्ञान तथा सर्वभूतात्माकी प्राप्ति ( अनु० ११५ । ५८-५९ )।
  • इनके द्वारा ब्राह्मणको राज्य-दान ( अनु० १६७ । ८ )।
  • जिनके नाम प्रातः - सायं कीर्तन करनेयोग्य हैं, उन राजाओंमें इनकी भी गणना ( अनु० ७.६५ । ५३ )।
  • इनकी आध्यात्मिक स्वराज्य-गाथा ( आश्व० ३१ । ७-१२ )।
  • (२) एक नाग, जो बलरामजीके रसातल-प्रवेशके समय स्वागतार्थ आया था ( मौसल० ४ । १६ )।

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