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नाभाग

  • वैवस्वतमनुके एक पुत्र ( आदि० ७५ । १५ ) ।
  • ये यमकी सभामें रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । १९ ) ।
  • इन्होंने समुद्रपर्यन्त पृथ्वीको जीतकर सत्यके द्वारा उत्तम लोकपर विजय पायी थी ( वन० २५ । १२ ) ।
  • इन्होंने दक्षिणाके रूपमें सारा राष्ट्र ब्राह्मणोंको दे दिया था ( शान्ति० ९६ । २२ ) ।
  • इन्होंने सात दिनमें पृथ्वीको जीता था । ये शीलवान् और दयालु थे । अतः इनके गुणोंपर बिकी हुई पृथ्वी स्वयं इनके पास आयी थी ( शान्ति० १२४ । १६-१७ ) ।
  • अमंगलकेसे कर्मोंको चोरी होनेपर शाप खाना ( अनु० १९५ । ३१ ) ।
  • इन्होंने जीवनमें कभी मांस नहीं खाया था । इन्हें मांसभक्षणके निषेधके कारण परावरत्वका ज्ञान हो गया था और अब ये ब्रह्मलोकमें विराज रहे हैं ( अनु० १९५ । ५८-६८ ) ।

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