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अम्बा -

  • काशिराजकी ज्येष्ठ पुत्री ( आदि० १०२ । ६० )।
  • भीष्मद्वारा विचित्रवीर्यके लिये इसका अपहरण ( आदि० १०२ । ५७ तथा सभा० ४१ । २३ )।
  • शाल्वके प्रति अपनी अनुरक्ति दिखाकर उनके साथ अपने विवाहके लिये इसकी भीष्मसे प्रार्थना ( आदि० १०२ । ६१-६२ )।
  • भीष्मद्वारा इसको शाल्वके समीप जानेकी अनुमति दी गयी ( आदि० १०२ । ६४ )।
  • अम्बाका शाल्वके प्रति अनुराग दिलाकर उनके पास जानेके लिये भीष्मसे आज्ञा माँगना ( उद्योग० १०४ । ५-१० )।
  • शाल्वराजसे अपनी धर्मपत्नी बनानेके लिये उसका अनुरोध ( उद्योग० १०५ । ११-१८ )।
  • शाल्वसे परित्यक्त होनेपर भीष्मसे बदला लेनेका विचार ( उद्योग० १०५ । २६-३५ )।
  • शैलालय मुनिके आश्रममें जाकर उनसे अपना दु:ख सुनाना ( उद्योग० १०५ । ३८-४४ )।
  • तापसोंके समझानेपर भी तपस्या करनेका ही अपना निश्चय बतलाना ( उद्योग० १०६ । १२-१४ )।
  • परशुरामजीसे भीष्मको मार डालनेका अनुरोध करना ( उद्योग० १०६ । ३४-४२; १०८ । ५-७ )।
  • भीष्मके वधके लिये अम्बाकी कठोर तपस्या ( उद्योग० १६६ । १९-२९ )।
  • गङ्गाद्वारा नदी होनेके शापसे वत्स देशमें नदी होना ( उद्योग० १६६ । ३१-४० )।
  • दूसरे जन्ममें तपस्या करके महादेवजी- से उसकी वर-प्राप्ति ( उद्योग० १८७ । ७-१५ )।
  • चिताकी आगमें प्रवेश ( उद्योग० १८७ । १९ )।
  • द्रुपदके यहाँ कन्यारूपमें जन्म और ‘शिखण्डी’ नाम पड़ना ( उद्योग० १८८ । ७-१९ )।

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