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निसुन्द

  • एक दैत्य, जो श्रीकृष्णद्वारा मारा गया था ( वन० १२१ । २९ ) ।
  • एक वृष्णिवंशी राजकुमार ( वन० १२० । १९ ) ।
  • (१) एक प्राचीन जनपद, जहाँके राजा राजसूय यज्ञमें युधिष्ठिरको भेंट देनेके लिये आये थे ( सभा० ५१ । २४ ) ।
  • (२) एक क्षत्रियवंश, जिसमें जनमेजय नामक कुलाङ्गार राजा प्रकट हुआ था ( उद्योग० ७४ । १३ ) ।
  • (१) कश्यप और कद्रूसे उत्पन्न हुआ प्रमुख नाग ( आदि० ३५ । ७ ) ।
  • (२) ( दुर्योधन ) माहिष्मती नगरीके एक राजा, जो क्रोधवशसंज्ञक दैत्यके अंशसे उत्पन्न हुए थे ( आदि० ६७ । ६१ ) ।
  • ये द्रौपदीके स्वयंवरमें गये थे ( आदि० १८५ । १० ) ।
  • सहदेवके साथ इनका भीषण युद्ध ( सभा० ३१ । २९ ) ।
  • अग्निदेवद्वारा राजा नीलकी सहायता ( सभा० ३१ । २९ ) ।
  • इनके द्वारा अग्निदेवको अपनी कन्याका दान ( सभा० ३१ । ३३ ) ।
  • अग्निदेवद्वारा राजा नीलकी सेनाको अभय-दान ( सभा० ३१ । ३५ ) ।
  • पराजित नीलद्वारा सहदेवका पूजन ( सभा० ३१ । ५८-५९ ) ।
  • कर्णने दिग्विजयके समय इन्हें पराजित किया था ( वन० २५४ । ५ ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इन्हें रणनिमन्त्रण भेजनेका विचार किया गया था ( उद्योग० ४ । १६ ) ।
  • दुर्योधनकी सहायतामें इनका सेनासहित आगमन ( उद्योग० ११ । २३-२४ ) ।
  • दुर्योधनकी सेनामें एक रथियोंकी गणनामें इनका भी नाम था ( उद्योग० १६६ । ४ ) ।
  • इन्होंने नर्मदाको भार्या- रूपमें पाकर उसके गर्भसे सुदर्शना नामक कन्या उत्पन्न की । उसे अग्निदेव चाहने लगे । राजाने इस बातको जानकर वह कन्या उनके साथ ब्याह दी । उससे सुदर्शन नामक पुत्र हुआ ( अनु० २ अध्याय ) ।
  • (३) एक पर्वत, जो उत्तरमें गन्धमादन और मन्दराचलके बाद आता है ( वन० १८८ । ११३ ) ।
  • गङ्गाद्वारमें भी एक नील पर्वत है, जहाँ स्नान करके पापरहित हुआ मनुष्य स्वर्गको जाता है ( अनु० २३ । १२ ) ।
  • (४) एक वानर-सेनापति, इनके द्वारा दूषणके छोटे भाई प्रमाथीका वध ( वन० २८१ । २७ ) ।
  • (५) पाण्डवपक्षका एक योद्धा, जो उदार रथी, सम्पूर्ण अस्त्रोंका ज्ञाता और महामनस्वी था ( उद्योग० १७१ । १५ ) ।
  • अनूप- देशका राजा, जिसे अश्वत्थामाने मूर्च्छित किया था ( भीष्म० ९४ । ३६ ) ।
  • इनके रथके घोड़ोंका वर्णन ( द्रोण० २२ । ६५ ) ।
  • दुर्जयके साथ युद्ध ( द्रोण० २५ । ४५ ) ।
  • अश्वत्थामाद्वारा वध ( द्रोण० २५ । ४५ ) ।

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