← अनुक्रमणिका

नीवारा

  • एक प्रमुख नदी, जिसका जल भारतीय जनता पीती है ( भीष्म० ९ । १८ ) ।
  • एक प्रसिद्ध एवं प्राचीन दानी राजा, जो यमराजकी सभामें विराजमान होते हैं ( सभा० ८ । ८ ) ।
  • नृगने वाराहतीर्थमें पयोष्णी नदीके तटपर यज्ञ किया था, जिसमें इन्द्र सोमपान करके मस्त हो गये थे और प्रचुर दक्षिणा पाकर ब्राह्मणलोग भी हर्षोल्लाससे परिपूर्ण हो गये थे ( वन० ८८ । ५-६; वन० १२९ । १-२ ) ।
  • इन्हें भारतवर्ष बहुत प्रिय था ( भीष्म० ९ । १० ) ।
  • ये शौर्यमें सुयश एवं सम्मानके भागी होकर उत्तम लोकोंको प्राप्त हुए थे ( भीष्म० १७ । ९-१० ) ।
  • श्रीकृष्ण-द्वारा गिरगिटकी योनिसे उद्धार ( अनु० ७० । ७ ) ।
  • श्रीकृष्णके पूछनेपर इनका अपनी आत्मकथा सुनाना ( अनु० ७० । १०-२८ ) ।
  • श्रीकृष्णकी आज्ञासे इनका स्वर्गलोकमें गमन ( अनु० ७० । २२ ) ।
  • गोदानमहिमाके प्रसंगमें इनका नामनिर्देश ( अनु० ७६ । २५ ) ।
  • मांस-भक्षणका निषेध करनेके कारण इनको परवरत्वका ज्ञान ( अनु० ११५ । ६० ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in