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परावसु

  • एक ऋषि, जो रैभ्य मुनिके पुत्र और अर्वावसुके बड़े भाई थे । हिंसक पशुके धोखेमें इनके द्वारा पिताका वध और उनका अन्त्येष्टि-संस्कार ( वन० १३८ । २-७ ) ।
  • इनका अपने छोटे भाई अर्वावसुको अपनी की हुई ब्रह्महत्याके निवारणके लिये व्रत करनेकी आज्ञा देना और उनका भाईकी आज्ञाको स्वीकार करना ( वन० १३८ । ८—१० ) ।
  • देवताओंद्वारा बृहद्बलके यज्ञमें इनका निकलवाया जाना ( वन० १३८ । २० ) ।
  • अर्वावसुके प्रयत्नसे इनका निर्दोष सिद्ध होना ( वन० १३८ । २१ ) ।
  • इनके द्वारा परशुरामजोपर आक्षेप ( शान्ति० ४९-५१ ) ।
  • ये अङ्गिराके वंशज माने जाते हैं ( शान्ति० २०८ । २६ ) ।
  • इन्होंने उपरिचरके यज्ञकी सदस्यता स्वीकार की ( शान्ति० ३३६ । ७ ) ।
  • ये इन्द्रसभाके सदस्य हैं ( सभा० ७ । १७ के बाद दाक्षिणात्य पाठ ) ।

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