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पराशर

  • (१) धृतराष्ट्रके वंशमें उत्पन्न एक नाम, जो जनमेजयके सर्पसत्रमें स्वाहा हो गया ( आदि० ५० । १९ ) ।
  • (२) महर्षि शक्तिके द्वारा उत्पन्न एक ऋषि, जो वसिष्ठ मुनिके पौत्र थे ( आदि० १०० । १ ) ।
  • राक्षसभावपन्न कल्माषपादद्वारा इनके पिता शक्तिका वध ( आदि० १०५ । ४० ) ।
  • बारह वर्षोंतक माताके गर्भमें इनका वेदव्यास ( आदि० १०६ । १५ ) ।
  • इनका 'पराशर' नाम होनेका कारण ( आदि० १०० । ३ ) ।
  • अपनी माताके मुँहसे राक्षस- द्वारा अपने पिताकी मृत्युका समाचार सुनकर सम्पूर्ण जगत्के विनाशके लिये इनका संकल्प ( आदि० १०० । ५-९ ) ।
  • भृगुवंशी और्वकी कथा सुनाकर वसिष्ठद्वारा इनके जगद्विनाशक संकल्पका निवारण ( आदि० १०० । ११ से अध्याय १०७ । तक ) ।
  • इनके द्वारा राक्षस- सत्रका अनुष्ठान; पुलस्त्य आदि महर्षियोंद्वारा इनके राक्षस- यज्ञका निवारण ( आदि० १०८ । ८-११ ) ।
  • सत्यवती- के रूपके प्रति इनका आकर्षण ( आदि० ६३ । ७०-७१ ) ।
  • इनका सत्यवतीको योजनगन्धा होनेका वरदान देना ( आदि० ६३ । ८०-८२ ) ।
  • इनके द्वारा सत्यवती के गर्भसे व्यासका जन्म ( आदि० ६३ । ८४ ) ।
  • ये भरद्वाजपर बड़े हुए भीष्मजीको देखनेके लिये उनके पास गये थे ( शान्ति० ४७ । १० ) ।
  • इन्होंने दयावश सौदासके पुत्रकी रक्षा की थी ( शान्ति० १७७ । ७७ ) ।
  • इनके द्वारा जनकको कल्याण-प्राप्तिके साधनका उपदेश ( शान्ति० २९० अध्याय ) ।
  • विश्वमहिषाके विषयमें युधिष्ठिरको अपना अनुभव बताना ( अनु० १८ । ४०-४५ ) ।
  • इनका अपने शिष्योंको विविध ज्ञानपूर्ण उपदेश ( अनु० १६ । २१ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ५०७४ से ५०८६ तक ) ।
  • पराशरमतानुसार सावित्री- मन्त्रका वर्णन ( अनु० १५० अध्याय ) ।

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