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पिशाच

  • (१) भूतयोनिविशेष । इनका प्राकट्य अण्डसे हुआ था ( आदि० ११ । ३५ ) ।
  • ये कुबेरकी सभामें रह-कर उनकी सेवा करते हैं ( सभा० १० । १९ ) ।
  • ब्रह्माजीकी सभामें रहकर उनकी उपासना करते हैं ( सभा० ११ । १४ ) ।
  • गोकर्ण तीर्थमें रहकर शिवजीकी आराधना करते हैं ( वन० ८५ । २५ ) ।
  • मरीचि आदि महर्षियोंने पिशाच आदि सब भूतोंकी सृष्टि की थी ( वन० २०४ । ३६ ) ।
  • इन्होंने रावणको अपना राजा बनाया था ( वन० २७५ । ३८ ) ।
  • पिशाच रक्त पीने और कच्चा मांस खानेवाले होते हैं ( द्रोण० ५० । ९—१३ ) ।
  • अलम्बुषके रथमें घोड़ोंकी जगह पिशाच जुते हुए थे ( द्रोण० १६७ । ३८ ) ।
  • इन्होंने घटोत्कचके साथ रहकर उसकी सहायता की थी और कर्णपर आक्रमण किया था ( द्रोण० १७५ । १०९ ) ।
  • खाण्डववन-दाहके समय अर्जुनने इन्हें जीता था ( कर्ण० ३७ । ३७ ) ।
  • अर्जुन और कर्णके युद्धके अवसरपर ये उपस्थित थे ( कर्ण० ८७ । ५० ) ।
  • भुशुण्डवान् पर्वतपर तपस्या करते हुए पार्वतीसहित शिवजीकी पिशाच आदि आराधना करते हैं ( आश्रम० ८ । ५—६ ) ।
  • महाभारतकालमें पिशाचलोग पृथ्वीके राजा होकर उत्पन्न हुए थे ( आश्रम० ३१ । ६ ) ।
  • (२) एक यक्षका नाम ( सभा० १० । १६ ) ।
  • (३) एक भारतीय जनपद, इस जनपदके योद्धा क्रौञ्चव्यूहके दाहिने पक्षकी जगह खड़े किये गये थे ( भीष्म० ५० । ५० ) ।
  • दुर्योधनकी सेनामें राजा भगदत्तके साथ पिशाचदेशीय सैनिक थे ( भीष्म० ८७ । ८ ) ।
  • श्रीकृष्णने किसी समय पिशाच देशके योद्धाओंको परास्त किया था ( द्रोण० ११ । १६ ) ।

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