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पुलह

  • ये ब्रह्माजीके मानस पुत्र हैं ( आदि० ६५ । १०; वन० २०४ । १२ ) ।
  • छः शक्तिशाली महर्षियोंमें इनका भी नाम है ( आदि० ६६ । ४ ) ।
  • पुलहके शरभ, सिंह, किम्पुरुष, व्याघ्र, रीछ, ईहामृग ( भेड़िया ) जातिके पुत्र हुए ( आदि० ६६ । ८ ) ।
  • ये अर्जुन-के जन्मसमय पधारे थे ( आदि० १२२ । ५२ ) ।
  • पराशरजीके राक्षससत्रमें महर्षियोंके साथ इनका आगमन ( आदि० १८० । ७ ) ।
  • ये इन्द्रकी सभामें विराजते हैं ( सभा० ७ । १७ ) ।
  • ब्रह्माजीकी सभामें रहकर ये उनकी उपासना करते हैं ( सभा० ११ । १६ ) ।
  • अलकनन्दा गङ्गाके तटपर ये जप और स्वाध्याय करते हैं ( वन० ९४ । २१ ) ।
  • स्कन्दके जन्ममहोत्सवमें ये भी पधारे थे ( शल्य० ४५ । ९ ) ।
  • इक्कीस प्रजापतियों-में एक ये भी हैं ( शान्ति० ३३४ । ३५ ) ।
  • चित्र-शिखण्डी नामक सात ऋषियोंमें भी इनका नाम है ( शान्ति० ३३४ । २९ ) ।
  • आठ प्रकृतियोंमें इनका भी नाम है ( शान्ति० ३४० । ३४-३५ ) ।
  • प्रयाणके समय भीष्मजीके पास आये हुए ऋषियोंमें ये भी थे ( अनु० २६ । ४ ) ।

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