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पूरु

  • (१) एक प्राचीन राजा ( आदि० ९ । ३३२ ) ।
  • जो राजा ययातिके द्वारा शर्मिष्ठाके गर्भसे उत्पन्न हुए थे ( आदि० ७५ । २५; आदि० ८३ । १० ) ।
  • ( ये पौरववंशके प्रवर्तक आदि पुरुष थे । ) इनके द्वारा अपने पिताको युवावस्थाका दान एवं उनकी वृद्धावस्थाका ग्रहण ( आदि० ७५ । ४३—४४; आदि० ८३ । ३४ ) ।
  • इनके द्वारा गुरुजनोंके आज्ञापालनकी महिमाका वर्णन ( आदि० ८३ । ३०—३१ के बाद दा० पाठ ) ।
  • प्रजाके अनुमोदन करनेपर ययातिद्वारा इनका राज्यपर अभिषेक होना ( आदि० ८५ । ३२ ) ।
  • कौसल्या ( पौत्री ) नामक पत्नीके गर्भसे इनके द्वारा जनमेजय ( प्रवीर ), ईश्वर तथा रौद्राश्वका जन्म एवं इनके वंशका संक्षिप्त वर्णन ( आदि० १४ अध्याय ) ।
  • इनके वंशका विस्तारपूर्वक वर्णन ( आदि० १५ अध्याय ) ।
  • ये यम-सभामें रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । १८ ) ।
  • इन्द्रके विमानपर बैठकर अर्जुनका कौरवोंके साथ होनेवाला युद्ध देखनेके लिये आये थे ( विराट० ५६ । १० ) ।
  • मान्धाताद्वारा इनकी पराजय ( द्रोण० ६२ । १० ) ।
  • ययातिद्वारा इन्हें खड्गकी प्राप्ति ( शान्ति० १६६ । ७४ ) ।
  • अगस्त्यके कमलोंकी चोरी होनेपर शाप खाना ( अनु० १४ । २२ ) ।
  • ये मांसभक्षणका निषेध करके परावर-तत्त्वका ज्ञान प्राप्त कर चुके थे ( अनु० ११५ । ५५ ) ।
  • ( २ ) अर्जुनका सारथि, जिसे राजसूय यज्ञके लिये अन्नसंग्रहके कामपर जुट जानेका आदेश मिला था ( सभा० ३३ । ३० ) ।

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