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पृथु

  • (१) आठ वसुओंमेंसे एक ( आदि० ६६ । ११ ) ।
  • ( २ ) एक कृष्णवंशी क्षत्रिय; जो द्रौपदीके स्वयंवरमें आया था ( आदि० १८५ । १८ ) ।
  • यह रैवतक पर्वतके उत्सवमें सम्मिलित हुआ था ( आदि० २१८ । १० ) ।
  • ( ३ ) महाराज वेनके पुत्र, प्रथम नरेश । इनके द्वारा अत्रिसुनिको धनदान ( वन० १८५ । ८—३५ ) ।
  • संजयको समझाते हुए नारदजी-द्वारा इनके चरित्रका वर्णन ( द्रोण० ६९ अध्याय ) ।
  • श्रीकृष्णद्वारा इनके चरित्रका वर्णन ( शान्ति० २२१ । १३०—१४४ ) ।
  • इनकी उत्पत्ति और चरित्रका विस्तृत वर्णन ( शान्ति० ५९ । ९८—१२६ ) ।
  • ये प्राचीन कालमें पृथ्वीके शासक थे; किंतु कालके पीड़ित हो पृथ्वीको छोड़कर परलोकवासी हो गये ( शान्ति० २२७ । ४६—४७ ) ।
  • इन्होंने जीवनमें कभी मांस नहीं खाया था ( अनु० ११५ । ७५ ) ।
  • ( ४ ) इक्ष्वाकुवंशी महाराज अनेना-के पुत्र; इनके पुत्रका नाम विष्वगरव था ( वन० २०२ । २-३ ) ।

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