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अरुन्धती (अक्षमाला) –

  • (१) महर्षि वसिष्ठकी पत्नी (आदि० १९८ । ६ तथा उद्योग० १९० । १९)।
  • वसिष्ठजीके चरित्रपर संदेह करनेके कारण इनकी कान्तिमें मलिनता ( आदि० २३२ । २०-२९)।
  • ये ब्रह्माजीकी सभामें विराजमान होती हैं ( सभा० ११ । ४० )।
  • अरुन्धतीसहित वसिष्ठने उज्जालक सरोवरके तटपर तपस्या- द्वारा शान्ति प्राप्त की ( वन० १३० । १० )।
  • अरुन्धती- की तपस्या और पतिसेवाके प्रभावसे स्वाहा उनका रूप धारण न कर सकी ( वन० २२५ । १५-१५)।
  • सप्तर्षियोंने केवल देवी अरुन्धतीको छोड़कर अन्य छः मुनिपत्नियोंको अपने यहाँसे निकाल दिया था (वन० २२६ । ८)।
  • शिवजी द्वारा इनके तपकी परीक्षा और इन्हें वरदान ( शल्य० ४३ । ३८-४४ )।
  • ब्रह्माजीने अग्निदेवसे द्रोण बाना (अनु० १५३ । ४५) यातुधानोंसे अपने नामका निर्वचन कहना ( अनु० १५३ । १६ )।
  • मृणालकी चोरीके विषयमें इनका शपथ खाना ( ५३ । १२०-१२८ )।
  • अगस्त्यजीके कमलोंकी चोरी होनेपर शपथ खाना (अनु० १५३ । ३८ )।
  • इनके द्वारा धर्मके रहस्यका वर्णन (अनु० १३० । ३-११ )।
  • देवताओंद्वारा अरुन्धतीकी प्रशंसा तथा ब्रह्माजीका उन्हें वर देना (अनु० १३० । १२-१३)।

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