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प्रतीप

  • एक कुरुवंशी राजा, जो धृतराष्ट्रके पुत्र थे । आदिपर्व १४ । ४९—६० के वर्णनके अनुसार कुरुसे इनकी परम्परा इस प्रकार है—कुरु, कुरुके पुत्र अध्वान ( अविक्षित् ), इनके परीक्षित् आदि आठ भाई, इनके कुलमें जनमेजय, जनमेजयसे धृतराष्ट्र और धृतराष्ट्रसे प्रतीप हुए; किंतु आदिपर्व ९५ । ३९—४४ के वर्णनके अनुसार कुरुसे विदूर, विदूरसे अनखा, अनखासे परीक्षित्, परीक्षित्से भीमसेन, भीमसेनसे प्रतिश्रवा और प्रतिश्रवासे प्रतीपका जन्म हुआ था । इनकी पत्नीका नाम शैब्या-सुनन्दा था; उससे इनके तीन पुत्र हुए देवापि, शान्तनु तथा बाह्लीक ( आदि० ९५ । ४५; आदि० ९५ । ४५ ) ।
  • इनके पास मनस्विनी गङ्गा सुन्दर रूप और उत्तम गुणोंसे युक्त युवती स्त्रीका रूप धारण करके गयी और इनके दाहिने ऊरुपर जा बैठी तथा इनके पूछनेपर उन्होंने इनकी पत्नी बननेकी कामना प्रकट की । तब इन्होंने उनका पुत्रवधूके रूपमें वरण किया ( आदि० ९७ । १—१६ ) ।
  • इनका एक दिव्य नारीको पत्नीरूपमें स्वीकार करनेके लिये अपने पुत्र शान्तनुको आदेश देना ( आदि० ९७ । २१— २३ ) ।
  • इनका शान्तनुको राज्य देकर वनमें प्रवेश करना ( आदि० ९७ । २९ ) ।
  • इनके परलोकवासी होनेकी चर्चा ( उद्योग० १४९ । २८ ) ।

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