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प्रद्युम्न

  • ये सनत्कुमारके अंशसे भगवान् श्रीकृष्णद्वारा रुक्मिणीके गर्भसे प्रकट हुए थे ( आदि० ६७ । १५२; सौप्तिक० १२ । ३०—३३ ) ।
  • अर्जुन और सुभद्राके विवाहके उपलक्ष्यमें दहेज लेनेवाले वृष्णिवंशियोंमें ये सबसे पहले थे ( सभा० १४ । ६ ) ।
  • शाल्वके पराक्रम से घबरायी हुई यादवसेनाको इनके द्वारा आश्वासन ( वन० १६ । ३०—३२ ) ।
  • इनका शाल्वके साथ घोर युद्ध ( वन० १७ अध्याय ) ।
  • संग्रामभूमिमें इनका मूर्च्छित होना ( वन० १७ । २२ ) ।
  • सारथिद्वारा मूर्च्छावस्थामें संग्रामसे हटा ले जानेपर इनका अनुताप और सारथिको उपालम्भ देना ( वन० १८ अध्याय ) ।
  • पुनः शाल्वके साथ युद्ध और उसे मारनेके लिये एक अद्भुत शत्रुनाशक बाणका संधान करना ( वन० १९ । १२—१९ ) ।
  • इनके पास नारद और वायुदेवका आकर देवताओंका संदेश सुनाना ( वन० १९ । २२—२४ ) ।
  • इनके द्वारा शाल्वकी पराजय ( वन० १९ । २६ ) ।
  • इनसे अनिरुद्ध प्रकट हुए थे ( भीष्म० ६५ । ७ ) ।
  • ये महारथी वीर थे ( द्रोण० ११० । ५९ ) ।
  • इनके नामकी निरुक्ति ( शान्ति० ३३९ । ३०—३८ ) ।
  • ये श्रीकृष्णके तीसरे स्वरूप माने जाते हैं ( अनु० १५८ । २९ ) ।
  • श्रीकृष्णसे ब्राह्मणकी महिमाके विषयमें पूछना ( अनु० १५४ । ४—७ ) ।
  • ये युधिष्ठिरके अश्वमेधयज्ञमें हस्तिनापुर आये थे ( आश्रम० ६६ । ३ ) ।
  • मौसल-युद्धमें इनका भोजोंके साथ युद्ध और इनके द्वारा इनका वध ( मौसल० ३ । ३३—३५ ) ।
  • मरणोपरान्त ये सनत्कुमारके स्वरूपमें प्रविष्ट हो गये ( स्वर्ग० ५ । १३ ) ।

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