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प्रभास

  • (१) ये धर्मके द्वारा प्रभाताके गर्भसे उत्पन्न हुए थे, इनकी गणना वसुओंमें है ( आदि० ६६ । १९—२० ) ।
  • (२) एक प्राचीन तीर्थ ( आदि० २१७ । ३ ) ।
  • यह पश्चिम समुद्रतटपर सौराष्ट्र देश ( काठियावाड़ ) में है, यह देवताओंका तीर्थ है ( वन० ८८ । २० ) ।
  • इसे सोमतीर्थ भी कहते हैं, सोमनाथ
  • नामक ज्योतिर्लिङ्गका स्थान यहीं है । ) यहाँ तीर्थ-यात्राके अवसरपर अर्जुनका श्रीकृष्णसे मिलन ( आदि० २१७ । ४ ) ।
  • प्रभासतीर्थमें श्रीकृष्णने एक हजार दिव्य वर्षांतक एक पैरसे खड़े होकर तपस्या की थी ( वन० १२ । १५-१६ ) ।
  • यहाँ अग्निदेव निवास करते हैं, इस तीर्थमें स्नान करके संयतचित्त मानव अतिरात्र और अग्निष्टोम यज्ञका फल पाता है ( वन० ८२ । ५८—६० ) ।
  • इसके प्रभावका विशेषरूपसे वर्णन ( वन० ३५ । ४१—४२ ) ।
  • यहाँ स्नान करनेसे मनुष्य विमानपर बैठकर स्वर्गमें जाता है और अप्सराएँ वहाँ स्तुति करती हुई उसे जगाती हैं ( अनु० ३५ । ५ ) ।
  • यहाँ ही यदुवंशियोंका परस्पर युद्ध करके विनाश हुआ था ( मौसल० ३ । १०—४६ ) ।
  • प्रभास तीर्थसे ही बलरामजी तथा भगवान् श्रीकृष्ण परम धाम पधारे थे ( मौसल० ४ अध्याय ) ।
  • (३) स्कन्दका एक सैनिक ( शल्य० ४५ । ६३ ) ।

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