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प्रह्लाद

  • (१) हिरण्यकशिपुका प्रथम पुत्र । इनकी माताका नाम कयाधु था । इनके तीन पुत्र थे—विरोचन, कुम्भ और निकुम्भ ( आदि० ६५ । १०-११ ) ।
  • ये वरुणसभामें रहकर वरुणकी उपासना करते हैं ( सभा० ९ । १२ ) ।
  • ब्रह्माजीकी सभामें भी उनकी सेवाके लिये उपस्थित होते हैं ( सभा० ११ । १९ ) ।
  • विदुरका इनका दृष्टान्त प्रस्तुत करना ( सभा० ६८ । ६५-६६ ) ।
  • इनके द्वारा बलिके प्रति तेज और क्षमाके अवसरका वर्णन ( वन० २८ । ६-३३ ) ।
  • विरोचन और सुधन्वाके संवादमें इनका निर्णय ( उद्योग० ६५ । ३५-३६ ) ।
  • ब्राह्मण-वेषमें शिष्यरूपसे प्रार्थना करनेपर इनके द्वारा इन्द्रको शीलका दान ( शान्ति० १२४ । २८-६२ ) ।
  • उन्होंने इन्हें दो गाथाएँ सुनायीं ( शान्ति० १३१ । ७०-७२ ) ।
  • इनका एक अवधूतसे आजगर-वृत्तिही प्रशंसा सुनना ( शान्ति० १७९ अध्याय ) ।
  • इनका इन्द्रके साथ संवाद ( शान्ति० २२२ । ९-१४ ) ।
  • ये पृथ्वीके प्रधान शासकोंमेंसे एक हैं ( शान्ति० २२७ । ५० ) ।
  • स्कन्दकी गाड़ी हुई शक्तिके उखाड़नेमें इनका असफल होना ( शान्ति० ३२७ । १८-१९ ) ।
  • (२) बाह्लीकवंशीय एक क्षत्रिय राजा, जो शल्भ नामक दैत्यके अंशासे उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । ३०-३१ ) ।
  • (३) एक नाग, जो वरुणसभामें उपस्थित हो वरुणकी उपासना करता है ( सभा० ९ । १० ) ।
  • (४) एक भारतीय जनपद ( भीष्म० ९ । ४६ ) ।

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