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बलाहक

  • (१) एक नाग, जो वरुणसभामें रहकर उनकी उपासना करता है ( सभा० ९ । ९ ) ।
  • (२) सिन्धुराज जयद्रथका एक भाई, जो द्रौपदीहरणके समय जयद्रथके साथ आया था ( वन० २६५ । १२ ) ।
  • (३) भगवान् श्रीकृष्णके रथका एक अश्व, जो दाहिने पार्श्वमें जोता जाता था ( विराट० ५५ । २३; द्रोण० १४७ । ४७ ) ।
  • (१) ये प्रह्लादजीके पौत्र एवं विरोचनके पुत्र थे । इनके पुत्रका नाम बाण था ( आदि० ६५ । २० ) ।
  • इन्द्रलोकपर इनका आक्रमण और विजय प्राप्त करना ( सभा० ३८ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ७८९ ) ।
  • इनके द्वारा वामन भगवान्‌को तीन पग भूमि देनेका संकल्प, भगवान् वामनद्वारा इनका बन्धन । इनको पाताललोकमें रहनेके लिये भगवान्‌की आज्ञा ( सभा० ३८ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ७९० ) ।
  • ये वरुणकी सभामें विराजते हैं ( सभा० ९ । १२ ) ।
  • इनका प्रह्लादसे क्षमा और तेजविषयक प्रश्न करना ( वन० २८ । ३-४ ) ।
  • बलि और वामनसम्बन्धी कथाका संक्षिप्त वर्णन ( वन० २७२ । ६३-६९ ) ।
  • विरोचनकुमार बलि बाल्यकालसे ही ब्राह्मणोंपर दोषारोपण करते थे, जिससे राज्यलक्ष्मीने उनका त्याग कर दिया ( शान्ति० १० । २४ ) ।
  • इन्द्रके आक्षेपयुक्त वचनोंका कठोर उत्तर देना ( शान्ति० २२३ अध्याय ) ।
  • कालकी प्रबलता बताते हुए इन्द्रको इनकी फटकार ( शान्ति० २२४ अध्याय ) ।
  • लक्ष्मीसे परित्यक्त होनेपर इन्द्रको चेतावनी देना ( शान्ति० २२५ । ३०-३२ ) ।
  • शोक न करनेके विषयमें इन्द्रद्वारा किये गये प्रश्नोंका उत्तर देना ( शान्ति० २२७ । २१-८८ ) ।
  • विरोचनकुमार बलिको देवताओं- ने धर्मपाशमें बाँधकर भगवान् विष्णुके पुरुषार्थसे पाताल- वासी बना दिया ( अनु० ६ । ३५ ) ।
  • जो दोषदृष्टि रखते हुए तथा श्रद्धासहित होकर दान दिया जाता है, उस सारे दानको ब्रह्माजीने असुरराज बलिके भाग निश्चित किया है ( अनु० १० । २० ) ।
  • पुष्प, धूप और दीप- दानके विषयमें शुक्राचार्यसे इनका प्रश्न करना ( अनु० ९८ । १५ ) ।
  • (२) एक ऋषि, जो युधिष्ठिरकी सभामें विराजते हैं ( सभा० ४ । १० ) ।
  • हस्तिनापुर जाते समय मार्गमें इनकी श्रीकृष्णसे भेंट ( उद्योग० ८३ । ६४ के बाद दाक्षिणात्य पाठ ) ।

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