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बहुबाशी

  • धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंमेंसे एक ( आदि० ६७ । १०२; आदि० ११६ । ११ ) ।
  • यह भीमसेनद्वारा मारा गया था ( भीष्म० २८ । २९ ) ।
  • (१) यह असुरराज बलिकका विख्यात पुत्र है तथा इसे लोग भगवान् शिवके पार्षद महाकालके नामसे जानते हैं ( आदि० ६५ । २०-२१ ) ।
  • इसकी राजधानीका नाम शोणितपुर था । इसने शिवजीकी तीव्र आराधना करके उनसे वरदान प्राप्त किया, जिससे यह देवताओंको सदा आतङ्कित किये रहता था । इसकी उन्नतिके लिये शुकाचार्य बराबर प्रयास करते रहते थे ( सभा० ३८ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ८२२ ) ।
  • इसने अनिरुद्धको कैद कर लिया था । नारदजीका समाचार पाकर बलराम तथा प्रद्युम्नसहित श्रीकृष्णने शोणितपुरपर आक्रमण किया । वहाँ शिव, कार्तिकेय, अग्नि आदि देवता इसकी राजधानीकी रक्षा कर रहे थे ( सभा० ३८ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ८२३ ) ।
  • तब बाणासुरके लिये भगवान् महेश्वरने श्रीकृष्णके साथ युद्ध किया । तदनन्तर शिवजीको परास्त करके श्रीकृष्ण बाणासुरके समीप पहुँचे और उसके साथ युद्ध आरम्भ किया । भगवान् श्रीकृष्णने साथ युद्धमें चक्रद्वारा इसकी भुजाएँ काट डाली गयीं और यह धरतीपर गिर पड़ा ( सभा० ३८ । २९ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ८२३ ) ।
  • बाणासुर क्रौञ्चपर्वतका आश्रय लेकर देवसमूहोंको कष्ट पहुँचाया करता था । यह देखकर महासेन ( स्कन्द ) ने इसपर आक्रमण किया और यह भागकर क्रौञ्चपर्वतमें जाकर छिप गया । इसीके कारण स्कन्दने क्रौञ्चपर्वतको विदीर्ण किया था ( शल्य० ४६ । ८२-८४ ) ।
  • ( २ ) स्कन्दका एक सैनिक ( शल्य० ४५ । ६० ) ।

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