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बाह्लिक (बाह्लीक)

  • (१) एक राजा, जो शत्रुविनाशक महातेजस्वी 'अहर' के अंशसे प्रकट हुआ था ( आदि० ६७ । २५ ) ।
  • (२) एक प्राचीन राजा, जो क्रोधवश- संज्ञक दैत्यके अंशसे उत्पन्न हुआ था ( आदि० ६७ । ६० ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इसे रण-निमन्त्रण भेजनेका विचार किया गया था ( उद्योग० ४ । १४ ) ।
  • यह कौरवपक्षका योद्धा था । इसे 'वाहीकराक्षस' कहा गया है । इसका द्रौपदीपुत्रोंके साथ युद्ध ( द्रोण० १६ । १२- १३ ) ।
  • (३) भरतवंशी महाराज कुरुके पौत्र एवं जनमेजयके तृतीय पुत्र ( आदि० ९५ । ५९ ) ।
  • (४) कुरुवंशी महाराज प्रतीपके पुत्र, देवापि और शान्तनुके भाई । ये महारथी वीर थे । इनकी माताका नाम सुनन्दा था, जो शिविदेशकी राजकुमारी थी ( आदि० ९५ । ५९ ) ( श्रीमद्भागवत ९ । २२ । १८ के अनुसार वाहीकके पुत्रका नाम सोम- दत्त था ) ।
  • इन्होंने कौरव-सभामें जुएका विरोध किया था ( सभा० ७४ । २५-२६ ) ।
  • महाराज युधिष्ठिरके संदेशको सुननेके लिये ये भी सभामें उपस्थित हुए थे ( उद्योग० ४७ । ६-७ ) ।
  • ये कौरवोंका पाण्डवोंके साथ युद्ध होना नहीं चाहते थे ( उद्योग० ५८ । ६-७ ) ।
  • युद्धमें फूट न हो, इस डरसे इन्होंने पाण्डवोंको राज्य- भाग दे दिया था ( उद्योग० १२९ । ३३ ) ।
  • दुर्योधन की ग्यारह अक्षौहिणी सेनाओंके जो सेनापति चुने गये थे, उनमें एक ये भी थे ( उद्योग० १५५ । ३३ ) ।
  • प्रथम दिनके युद्धमें धृष्टकेतुके साथ इनका द्वन्द्वयुद्ध ( भीष्म० ४५ । ३८-४१ ) ।
  • भीमसेनद्वारा पराजित होना ( भीष्म० १०४ । २६-२७ ) ।
  • द्रुपदके साथ युद्ध ( द्रोण० २५ । १८-१९ ) ।
  • शिखण्डीके साथ युद्ध ( द्रोण० ९६ । ९-१० ) ।
  • भीमसेनद्वारा वध ( द्रोण० १५७ । १५ ) ।
  • भीष्मके पूछनेपर कन्या-विवाहके विषयमें इनका अपना निर्णय देना ( अनु० ४४ । ४३- ४६ ) ।
  • (५) युधिष्ठिरके सारथिका नाम ( सभा० ५८ । २० ) ।
  • (६) एक भारतीय जनपद ( भीष्म० ९ । ४४ ) ।

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