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बृहदश्व

  • ( १ ) एक प्राचीन महर्षि । ये युधिष्ठिरका अधिक सम्मान करते थे ( वन० २६ । २४-२५ ) ।
  • इनका काम्यकवनमें युधिष्ठिरके पास आगमन ( वन० ५२ । ४० ) ।
  • युधिष्ठिरद्वारा इनका सत्कार तथा इनके प्रति अपने दुःख-दैन्यका वर्णन करना ( वन० ५२ । ४५-५० ) ।
  • युधिष्ठिरको समझाते हुए इनका नलोपा- ख्यान सुनाना ( वन० ५२ । ५४ से ७९ अध्याय- तक ) ।
  • इनके द्वारा युधिष्ठिरको आश्वासन तथा उन्हें अक्षहृदय और अधिरथका उपदेश देकर स्नान आदिके लिये प्रस्थान ( वन० ७९ । ११-२१ ) ।
  • ( २ ) ये इक्ष्वाकुवंशी राजा श्रावस्तके पुत्र थे । इनके पुत्रका नाम कुवलाश्व था ( वन० २०२ । ४-५ ) ।
  • ये यथासमय अपने पुत्र कुवलाश्वको राज्यपर अभिषिक्त करके स्वयं तपस्याके लिये तपोवनमें चले गये ( वन० २०२ । ७-८ ) ।

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