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बृहद्ब्रह्मा

  • देशके राजा है । इन्हें पूर्वदिग्विजयके समय भीमसेनने परास्त किया था ( सभा० ३० । १ ) ।
  • इनके द्वारा राजसूययज्ञमें युधिष्ठिरको चौदह हजार उत्तम अश्वोंकी भेंट दी गयी थी ( सभा० ५१ । ७ के बाद दाक्षिणात्य पाठ ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इन्हें रणनिमन्त्रण भेजनेका विचार किया गया था ( उद्योग० ८५ । २२ ) ।
  • ये कौरवपक्षसे लड़ने आये थे । दुर्योधनने सैन्यसमुद्रमें इनकी उपमा ज्वारसे दी है ( उद्योग० १६१ । ३१ ) ।
  • प्रथम दिनके युद्धमें अभिमन्युके साथ इनका द्वन्द्वयुद्ध ( भीष्म० ४५ । १२—१४ ) ।
  • घटोत्कचद्वारा इनकी पराजय ( भीष्म० १२१ । ४१ ) ।
  • अभिमन्युके साथ इनका घोर युद्ध ( द्रोण० ११६ । ३१—३६; द्रोण० ३० । ५—६ ) ।
  • अभिमन्युके साथ युद्ध और उनके द्वारा इनका वध ( द्रोण० ४७ । २०—२२ ) ।
  • इनकी स्त्रियोंका इन्हें सब ओरसे घेरकर रोदन ( स्त्री० २५ । १० ) ।
  • महर्षि अङ्गिराके द्वारा सुभाके गर्भसे उत्पन्न सात पुत्रोंमेंसे एक ( वन० २१८ । २ ) ।
  • वेदोंके पारगामी विद्वान् भानुनामक अग्निको ही बृहद्ब्रह्मा कहते हैं ( वन० २२१ । ८ ) ।
  • महर्षि अङ्गिराके द्वारा सुभाके गर्भसे उत्पन्न सात पुत्रोंमेंसे एक ( वन० २१८ । २ ) ।
  • ये सूर्यकी कन्या तथा भानुनामक अग्निकी भार्या हैं ( वन० २२१ । ९ ) ।

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