← अनुक्रमणिका

भास्वर

  • सूर्यद्वारा स्कन्दको दिये गये दो पार्षदोंमेंसे एक । दूसरेका नाम सुप्रभ था ( शल्य० ४५ । ३१ ) ।
  • (१) कश्यपद्वारा मुनिके गर्भसे उत्पन्न एक देवगन्धर्व ( आदि० ६५ । ४३ ) ।
  • (२) धृतराष्ट्रके सौ पुत्रोंमेंसे एक ( आदि० १०२ । १० ) ।
  • यह भीमसेनद्वारा मारा गया ( भीष्म० ६५ । १५-१८ ) ।
  • (३) ये महाराज इन्द्रसेन द्वारा दमयन्तीके गर्भसे उत्पन्न हुए थे । इनके चार भाई और थे—दुष्यन्त, शूर, प्रवसु और वसु ( आदि० ९५ । १५-१८ ) ।
  • (४) ये विदर्भदेशके राजा थे ( वन० ५३ । ५ ) ।
  • कर्णनरेश सुदामाकी पुत्री इनकी पत्नी थी ( वन० ५३ । १५-१५ ) ।
  • महर्षि दमनकी कृपासे इन्हें दस, दान्त और दमन नामक तीन पुत्र तथा दमयन्ती नाम्नी कन्याकी प्राप्ति ( वन० ५३ । ६-९ ) ।
  • इनके द्वारा दमयन्तीके स्वयंवरका आयोजन ( वन० ४४ । ८-९ ) ।
  • इनके द्वारा नलके साथ दमयन्तीका विवाह किया जाना ( वन० ५० । ४०-४१ ) ।
  • सारथि वार्ष्णेयके द्वारा लाये गये राजा नलके बच्चोंको अपने आश्रयमें रखना ( वन० ६० । २३-२४ ) ।
  • दमयन्ती द्वारा इनके गुणोंका वर्णन ( वन० ६४ । ४४-४७ ) ।
  • इनका नल-दमयन्तीकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको पुरस्कारकी घोषणा करके चारों ओर भेजना ( वन० ६८ । २-५ ) ।
  • महारानीकी प्रेरणासे राजा नलकी खोजके लिये ब्राह्मणोंको आज्ञा देकर भेजना ( वन० ६९ । ३४ ) ।
  • इनके द्वारा अपने यहाँ आये हुए अयोध्यानरेश ऋतुपर्णका स्वागत ( वन० ७३ । २० ) ।
  • प्रकट हुए राजा नलको पुत्रकी भाँति अपनाना और आदर-सत्कारके साथ आश्वासन देना ( वन० ७७ । ३५-३६ ) ।
  • एक महीनेके पश्चात् सेना, रथ आदिके साथ राजा नलको विदा करना ( वन० ७८ । १-२ ) ।
  • इनके द्वारा आदर-सत्कारके साथ राजा नलसहित दमयन्तीकी विदाई ( वन० ७९ । १-२ ) ।
  • ( ५ ) ये देवताओंके वज्रका विनाश करनेवाले पाञ्चजन्यद्वारा उत्पन्न पाँच विनायकोंमें हैं ( वन० २२१ । ११ ) ।
  • ( ६ ) अंशद्वारा स्कन्दको दिये गये पाँच अनुचरोंमेंसे एक । शेष चारोंके नाम—परिघ, वट, दंष्ट्रि और दहन ( शल्य० ४५ । ३४-३५ ) ।
  • ( ७ ) एक प्राचीन नरेश । ये यमकी सभामें रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं, इस सभामें भीम नामके सौ राजा हैं ( सभा० ८ । २४ ) ।
  • इन्होंने तपस्याद्वारा प्रजाओंका कष्टसे उद्धार किया था ( वन० ३ । ११ ) ।
  • ये प्राचीनकालमें पृथ्वीके शासक थे; किंतु कालसे पीड़ित हो इसे छोड़कर चले गये ( शांति० २२७ । ४९ ) ।

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in