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भूमि

  • ( १ ) भूदेवी; ये ब्रह्माजीकी पुत्री और भगवान् नारायणकी पत्नी हैं; भगवान् वाराहके साथ समागम होनेपर इनके गर्भसे एक पुत्र हुआ, जो इस भूतलपर भौम अथवा नरकके नामसे प्रसिद्ध हुआ है । भगवान् श्रीकृष्णद्वारा भौमासुरके मारे जानेपर इन्होंने स्वयं प्रकट हो आदितिके दोनों कुण्डल लौटाये और नरकासुरकी संतानकी रक्षाके लिये श्रीकृष्णसे प्रार्थना की ( सभा० ३८ । २३ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ८०८ ) ।
  • इनका अपना भार उतारनेके लिये भगवान् विष्णुसे प्रार्थना करना ( वन० १४२ । ४१-४२ ) ।
  • वाराहरूपधारी विष्णुद्वारा इनका उद्धार ( वन० १४२ । ४४-४७ ) ।
  • संजयका धृतराष्ट्रसे इनकी महिमाका वर्णन करना ( भीष्म० ८ । १० से भीष्म० ८ । १२ तक ) ।
  • श्रीकृष्णसे वैष्णवास्त्र माँगनेकी कथाकी चर्चा ( द्रोण० २९ । ३०-३१ ) ।
  • पृथुसे अपने को अपनी कन्या माननेके लिये प्रार्थना करना ( द्रोण० ६९ । १५ ) ।
  • परशुरामजीद्वारा क्षत्रियसंहार हो जानेके बाद कश्यपजीसे भूमिको याचना करना और बचे हुए राजकुमारोंका पता बताना ( शान्ति० ४९ । ७४-७६ ) ।
  • श्रीकृष्णके पूछनेपर ब्राह्मणोंकी महिमाका वर्णन करना ( अनु० २३ । २२-२९ ) ।
  • इनका भगवान् श्रीकृष्णको गृहस्थधर्म सुनाना ( अनु० ९७ । ५-२३ ) ।
  • राजा अङ्गके साथ स्पर्धा होनेके कारण अदृश्य हो जाना ( अनु० १५३ । २ ) ।
  • इनका कायस्थी नाम पड़नेका कारण ( अनु० १५७ । ५ ) ।
  • ( २ ) प्राचीन नरेश भूमिपतिकी भार्या ( उद्योग० ११० । १४ ) ।

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