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भूरिश्रवा

  • ये कुरुवंशीय सोमदत्तके पुत्र थे । इनके दो भाइयोंका नाम भूरि और शल था । ये पिता और भाइयोंके साथ द्रौपदी-स्वयंवरमें गये थे ( आदि० १८५ । १४—१५ ) ।
  • इनके द्वारा पाण्डवोंके पराक्रमका वर्णन और उनसे युद्ध न करके उनके साथ संधि करनेके लिये दुर्योधनको समझानेका उल्लेख ( आदि० १९९ । ७ के बाद दाक्षिणात्य पाठ, पृष्ठ ८२० ) ।
  • अपने पिता और भाइयोंके साथ ये युधिष्ठिरके राजसूययज्ञमें आये थे ( सभा० ३४ । ८ ) ।
  • इनका एक अक्षौहिणी सेनासहित दुर्योधनकी सहायतामें आना ( उद्योग० १९ । १६ ) ।
  • रथियोंके यूथपतियोंके यूथपतिके रूपमें इनकी भीष्मद्वारा गणना ( उद्योग० १६५ । २९ ) ।
  • प्रथम दिनके युद्धमें इनका धृष्टकेतुके साथ द्वन्द्वयुद्ध ( भीष्म० ४५ । ३५—३७ ) ।
  • इनकी सात्यकिपर चढ़ाई और उनके साथ युद्ध ( भीष्म० ६३ । ३३ से ६४ । ४ तक ) ।
  • इनका सात्यकिके साथ घोर युद्ध ( भीष्म० ७४ अध्याय ) ।
  • इनके द्वारा सात्यकिके दस पुत्रोंका वध ( भीष्म० ७४ । २५ ) ।
  • पृषत्केतुके साथ इनका युद्ध तथा इनके द्वारा पृषत्केतुकी पराजय ( भीष्म० ८४ । ३५—३९ ) ।
  • भीमसेनके साथ इनका द्वन्द्व-युद्ध ( भीष्म० ११० । १०—११; भीष्म० १११ । ४४—४५ ) ।
  • शिखण्डीके साथ इनका युद्ध ( द्रोण० १४१ । ४३—४५ ) ।
  • मणिमान्के साथ युद्ध करके उसका वध करना ( द्रोण० २३ । ५३—५५ ) ।
  • इनके ध्वजका वर्णन ( द्रोण० १०५ । २२—२९ ) ।
  • सात्यकिके साथ युद्ध करके उनकी चुटिया पकड़कर घसीटना ( द्रोण० १४२ । ५९—६२ ) ।
  • अर्जुनद्वारा इनकी दाहिनी भुजाका काटा जाना ( द्रोण० १४२ । ७२ ) ।
  • इनके द्वारा अर्जुनको उपालम्भ दिया जाना ( द्रोण० १४३ । ४—१५ ) ।
  • इनका आमरण अनशनके लिये बैठना ( द्रोण० १४३ । ३३—३५ ) ।
  • सात्यकिद्वारा इनका वध ( द्रोण० १४३ । ४४ ) ।
  • मृत्युके पश्चात् इनका विश्वे-देवोंमें प्रविष्ट होना ( स्वर्ग० ५ । १६ ) ।

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