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भृगुतुङ्ग

  • एक प्राचीन पर्वत, जहाँ राजा ययातिने अपनी पत्नियोंके साथ तपस्या की थी ( आदि० १९५ । ५० ) ।
  • तीर्थयात्राके अवसरपर अर्जुनका यहाँ आगमन हुआ था ( आदि० २१४ । २ ) ।
  • यहाँ शाकाहारी होकर एक मास निवास करनेसे अश्वमेध यज्ञका फल मिलता है ( वन० ८४ । ५० ) ।
  • यहाँ उपवास करनेसे मनुष्य अपने आगे-पीछेकी सात-सात पीढ़ियोंका उद्धार कर देता है ( वन० ८५ । १९-२२ ) ।
  • इस महान् पर्वतकी भृगुतुङ्ग-आश्रमके नामसे भी प्रसिद्धि है । यहाँ भृगुजीने तपस्या की थी ( वन० ९० । २३ ) ।
  • भृगुतुङ्गमें एक 'महाह्रद' नामक तीर्थ या सरोवर है । जो लोभका त्याग करके यहाँ स्नान करता और तीन राततक निराहार रहता है, वह ब्रह्महत्याके पापसे मुक्त हो जाता है ( अनु० २३ । १८-१९ ) ।

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