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मकरी

  • भारतवर्षकी एक प्रधान नदी, जिसका जल यहाँके निवासी पीते हैं ( भीष्म० ९ । २३ ) ।
  • एक प्राचीन देश । बिहार प्रान्तका दक्षिणी भाग; इसकी राजधानी गिरिव्रज ( आधुनिक राजगृह ) थी ( सभा० २१ । २-३ ) ।
  • किसी समय बृहद्रथ मगध देशके राजा थे ( आदि० ६३ । ३० ) ।
  • कलियोंमें जो महान् श्रेष्ठ असुर था, वही मगध देशमें जयत्सेन नामका राजा हुआ था ( आदि० ६७ । ४८ ) ।
  • इस देशपर पाण्डुने आक्रमण करके वहाँके राजा 'दर्घ' का वध किया था ( आदि० ११२ । २६-२७ ) ।
  • इस देशमें राजा बृहद्रथने जरा राक्षसी ( गृद्धी ) के लिये महान् उत्सव मनानेकी आज्ञा जारी की थी ( सभा० १८ । १० ) ।
  • महाभारतकालमें जरासंध मगध देशका राजा था, जिसे भगवान् श्रीकृष्णने युक्तिपूर्वक भीमसेनद्वारा मरवा डाला ( सभा० २४ । ७ के बाद दा० पाठ ) ।
  • जरासंधके मरनेके बाद उसके पुत्र सहदेवको भगवान् श्रीकृष्णने मगध देशके राज्यपर अभिषिक्त कर दिया ( सभा० २९ । ४३ ) ।
  • इस देशको पूर्व दिग्विजयके समय भीमसेनने अपने वशमें कर लिया था ( सभा० ३० । १६-१८ ) ।
  • यहाँके राजा भी युधिष्ठिरके राजसूय-यज्ञमें भेंट लेकर आये थे ( सभा० ५२ । १८ ) ।
  • यहाँके राजा तथा निवासी महाभारत-युद्धमें युधिष्ठिरके पक्षमें आये थे ( उद्योग० ५३ । २ ) ।
  • इस देशकी गणना भारतके प्रमुख जनपदोंमें है ( भीष्म० ९ । ५० ) ।
  • (१) एक तीर्थ, यहाँ जानेसे अग्निष्टोम और अतिरात्र यज्ञोंका फल मिलता है ( वन० ८४ । ५१ ) ।
  • (२) सत्ताईस नक्षत्रोंमें एक नक्षत्रका नाम । जब मङ्गल ग्रह वक्र होकर मघा नक्षत्रपर आता है, तब अमङ्गलका सूचक होता है ( भीष्म० ३ । १४ ) ।
  • मघा नक्षत्रपर चन्द्रमाकी स्थिति होनेसे अपशकुन समझना चाहिये ( भीष्म० १७ । १२ ) ।
  • जो मनुष्य मघा नक्षत्रमें तिलसे भरे हुए वर्धमान पात्रोंका दान करता है, वह इस लोकमें पुत्रों और पशुओंसे सम्पन्न हो परलोकमें आनन्दका भागी होता है ( अनु० ६४ । १२ ) ।
  • आश्विन मासके कृष्णपक्षमें मघा और त्रयोदशीका संयोग होनेपर घृतमिश्रित खीरका दान करनेसे पितरोंकी तृप्ति होती है ( अनु० १२६ । ३५-३७ ) ।
  • मघा नक्षत्रमें छायामें बैठकर उसके कानसे हवा लेते हुए चावलकी खीर या लौहशाकका पितरोंके लिये दान करनेसे पितर संतुष्ट होते हैं ( अनु० ८८ । ८ ) ।
  • मघा में दान करनेवाला मनुष्य अपने कुटुम्बीजनोंमें श्रेष्ठ होता है ( अनु० ८९ । ५ ) ।
  • चान्द्रव्रतके समय मघाकी चन्द्रमाके नासिका-स्थानपर भावना करनी चाहिये ( अनु० ११७ । ८ ) ।

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