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मङ्कणक

  • एक प्राचीन ऋषि, जो वायुदेवद्वारा सुकन्याके गर्भसे उत्पन्न हुए थे ( शल्य० ३८ । ५ ) ।
  • सत्तरहसठ तीर्थमें इन्हें सिद्धि प्राप्त हुई थी । एक बार इनके हाथमें कुश लग जानेसे घाव हो गया, जिससे शाकका रस चूने लगा । उस देखकर हर्षके मारे ये नृत्य करने लगे ( वन० ८३ । ११५-११७ ) ।
  • महादेवजीका इनके पास आगमन तथा नृत्यका कारण पूछना ( वन० ८३ । १२०-१२१ ) ।
  • इनका महादेवजीसे अपने हर्षका कारण बताना ( वन० ८३ । १२२-१२३ ) ।
  • महादेवजीके शरीरसे झरती हुई भस्मको देखकर इनका लज्जित होकर उनके चरणोंमें गिरना और महादेवजीकी स्तुति करना ( वन० ८३ । १२४-१२९ ) ।
  • इन्हें शिवजीसे वरदान प्राप्त होना ( वन० ८३ । १२४-१३१ ) ।
  • इनके सात पुत्रोंकी उत्पत्ति हुई थी, जो सब-के-सब ऋषि हुए । उनके नाम हैं—वायुवेग, वायुबल, वायुदा, वायुमण्डल, वायुजवाल, वायुदा और वायुचक्र ( शल्य० ३८ । ३४-३८ ) ।
  • इनके चरित्रका विशेषरूपसे वर्णन ( शल्य० ३८ । ३८-५८ ) ।

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