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मणिमान्

  • (१) एक राजा, जो दनायुके पुत्र वृत नामक असुरके अंशसे उत्पन्न हुए थे ( आदि० ६७ । ४४ ) ।
  • ये द्रौपदीके स्वयंवरमें पधारे थे ( आदि० १८५ । १५ ) ।
  • पाण्डवोंके दिग्विजयके समय इन्हें पराजित किया था ( सभा० ३० । ११ ) ।
  • पाण्डवोंकी ओरसे इन्हें रणनिमन्त्रण भेजनेका निश्चय किया गया था ( उद्योग० ४ । २० ) ।
  • इनका भूरिभवाके साथ युद्ध और उनके द्वारा इनका वध ( द्रोण० २६ । ५३-५५ ) ।
  • द्रोणाचार्यद्वारा इनके मारे जानेकी चर्चा ( कर्ण० ६ । १३-१४ ) ।
  • (२) एक नाग, जो वरुणकी सभामें रहकर उनकी उपासना करता है ( सभा० ९ । ९ ) ।
  • (३) एक तीर्थ, जहाँ एक रात निवास करनेसे अग्नि-होम यज्ञका फल प्राप्त होता है ( वन० ८२ । १०१ ) ।
  • (४) एक यक्ष या राक्षस, जो कुबेरका सखा था । इसका भीमसेनके साथ युद्ध और उनके द्वारा वध ( वन० १६० । ५९-७७ ) ।
  • अगस्त्यजीका अपमान करनेके कारण उनके द्वारा इसे शाप मिलनेकी चर्चा ( वन० १६१ । ६०-६२ ) ।
  • (५) एक पर्वत, जो स्वप्नमें श्रीकृष्णके साथ शिवजीके पास जाते हुए अर्जुनको मार्गमें मिला था ( द्रोण० ८० । २४ ) ।

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