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मद्र

  • मद्र—एक प्राचीन भारतीय जनपद ( जो आधुनिक मतके अनुसार रावी और चिनाब अथवा रावी और झेलमके मध्यवर्ती भू-भागमें स्थित था ) ।
  • भीष्मजीका बूढ़े सेनापति, ब्राह्मणों तथा सेनाके साथ इस देशमें जाना और माद्रीके लिये माद्रीका वरण करना ( आदि० ११२ । २—७ ) ।
  • अर्जुनके जन्मकालमें आकाशवाणी हुई थी कि यह बालक आगे चलकर मद्र आदि देशोंपर विजय पायेगा ( आदि० १२२ । ४० ) ।
  • पाण्डुपुत्र नकुलने इन देशोंपर प्रेमसे ही विजय पायी थी ( सभा० ३२ । १४-१५ ) ।
  • मद्र या मद्रदेशक लोग युधिष्ठिरके लिये भेंट लेकर आये थे ( सभा० ५२ । १४ ) ।
  • सती सावित्रीके पिता अश्वपति मद्रदेशके ही नरेश थे ( वन० २९३ । १३ ) ।
  • कर्णने मद्र और बाहीक आदि देशोंको आचारभ्रष्ट बताकर उनकी निन्दा की थी ( कर्ण० अध्याय ४४ से ४५ तक ) ।

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