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मरीचि

  • (१) ब्रह्माजीके मानस पुत्र । कश्यपके पिता ( आदि० ६५ । १०-११; आदि० ७५ । १० ) ।
  • इनकी उत्पत्तिका वर्णन ( अनु० ८५ । १०० ) ।
  • ये अर्जुनके जन्ममहोत्सवमें पधारे थे ( आदि० १२२ । ५२ ) ।
  • ये इन्द्रकी सभामें विराजते हैं ( सभा० ७ । १७ ) ।
  • ब्रह्माजीकी सभामें उपस्थित हो उनकी उपासना करते हैं ( सभा० ११ । १८ ) ।
  • स्कन्दके जन्मकालमें उनके पास गये थे ( शल्य० ४५ । १० ) ।
  • शरशय्यापर पड़े हुए भीष्मके पास ये भी गये थे ( शान्ति० ४७ । १० ) ।
  • इन्हें अङ्गिरासे दण्डकी प्राप्ति हुई । इन्होंने उसे भृगुको दिया था ( शान्ति० १२२ । २७ ) ।
  • ये ब्रह्माजीके प्रथम पुत्र हैं, इन्हें विष्णुने खड्ग दिया और इन्होंने उसे अन्य महर्षियोंको दिया ( शान्ति० १६६ । १५ ) ।
  • ये इक्कीस प्रजापतियोंमेंसे एक हैं ( शान्ति० २२५ । ३५ ) ।
  • ये आठ प्रकृतियों मेंसे एक हैं ( शान्ति० ३४० । ३४ ) ।
  • अग्निकी मरीचियों ( किरणों ) से मरीचिका प्रादुर्भाव हुआ ( अनु० ८५ । १०० ) ।
  • (२) एक स्वर्गीय अप्सरा, जिसने अर्जुनके जन्ममहोत्सवमें आकर गान-नृत्य किया था ( आदि० १२२ । ६२ ) ।

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