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मागध

  • कौरव-पक्षके मगधदेशीय योद्धा ( भीष्म० ५१ । १२ ) ।
  • ( १ ) बारह महीनोंमेंसे एक, जिस मासकी पूर्णिमाको 'मघा' नक्षत्रका योग हो; उसे 'माघ' कहते हैं । यह पौषके बाद और फाल्गुनके पहले आता है । ( २ ) माघ मासकी अमावस्याको प्रयागराजमें तीन करोड़ दस हजार अन्य तीर्थोंका समागम होता है । जो माघ मासमें प्रयागमें स्नान करता है, वह सब पापोंसे मुक्त होकर स्वर्गमें जाता है ( अनु० २५ । ३६—३८ ) ।
  • जो माघ मासमें ब्राह्मणको तिल दान करता है, वह कभी नरक नहीं देखता है ( अनु० ६६ । ८ ) ।
  • जो माघ मासको नियमपूर्वक एक समय भोजन करके बिताता है, वह धनवान् कुलमें जन्म लेकर अपने कुटुम्बीजनोंमें महत्त्वको प्राप्त होता है ( अनु० १०६ । ३१ ) ।
  • माघ मासको द्वादशी तिथिको दिन-रात उपवास करके भगवान् माधवकी पूजा करनेसे उपासकको राजसूय यज्ञका फल प्राप्त होता है और वह अपने कुलका उद्धार कर देता है ( अनु० १०६ । ५ ) ।
  • माघ मासके शुक्लपक्षकी अष्टमी तिथिको भीष्मजीने देह-त्यागके लिये भगवान् श्रीकृष्णसे आज्ञा माँगी ( अनु० १६७ । २८—४५ ) ।

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