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माधवी

  • (१) राजा ययातिकी पुत्री, जो तपस्विनी और मृगचर्मसमावृत होकर मृगवनका पालन कर रही थी । इसका अष्टक आदि पुत्रोंको ययाति का परिचय देना; अपने पुण्योंद्वारा स्वर्ग जानेके लिये इसका ययातिको आश्वासन ( आदि० ९३ । १२ के बाद, पृष्ठ २८२ ) ।
  • ययातिने गालवको अपनी कन्या माधवी सौंपना ( उद्योग० ११५ । १२ ) ।
  • माधवीका गालवसे अपने मनकी बात कहना ( उद्योग० ११६ । १०-१३ ) ।
  • इसके गर्भसे अयोध्यानरेश हर्यश्वद्वारा वसुमान् ( वसुमाना ) की उत्पत्ति ( उद्योग० ११६ । १६ ) ।
  • काशिराज दिवोदासके द्वारा इसके गर्भसे प्रतर्दनका जन्म ( उद्योग० ११८ । १० ) ।
  • उशीनरके द्वारा शिवि नामक पुत्रकी उत्पत्ति ( उद्योग० ११८ । २० ) ।
  • विश्वामित्रके द्वारा इसके गर्भसे अष्टकका जन्म ( उद्योग० ११९ । १८ ) ।
  • इसके स्वयंवरका वर्णन ( उद्योग० १२० । १-५ ) ।
  • इसका स्वयंवरमें तपोवनका वरण करके मृगीरूपसे तप करना ( उद्योग० १२० । ५-११ ) ।
  • स्वर्गलोकसे गिरे हुए पिता ययातिके लिये इसका अपने तपके आधे पुण्योंको देनेके लिये उद्यत होना ( उद्योग० १२० । २५ ) ।
  • (२) स्कन्दकी अनुचरी एक मातृका ( शल्य० ४६ । ७ ) ।

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