← अनुक्रमणिका

मासव्रतोपवासफल

  • जो आश्विन मासको एक समय भोजन करके बिताता है, वह पवित्र, नाना प्रकारके वाहनोंसे सम्पन्न तथा अनेक पुत्रोंसे युक्त होता है ( अनु० १०६ । २९ ) ।
  • आश्विन मासकी द्वादशी तिथिको दिनरात उपवास करके पद्मनाभ नामसे भगवान्की पूजा करनेवाला पुरुष सहस्र गोदानका पुण्यफल पाता है ( अनु० १०९ । १३ ) ।
  • जो मनुष्य कार्तिक मासमें एक समय भोजन करता है, वह शूरवीर, अनेक भार्याओंसे संयुक्त और कीर्तिमान् होता है ( अनु० १०६ । ३० ) ।
  • कार्तिक मासकी द्वादशी तिथिको दिनरात उपवास करके भगवान् दामोदरकी पूजा करनेसे स्त्री हो या पुरुष, गोमेधयज्ञका फल पाता है ( अनु० १०९ । १४ ) ।
  • जो नियमपूर्वक रहकर चैत्र मासको एक समय भोजन करके बिताता है, वह सुवर्ण, मणि और मोतियोंसे सम्पन्न महान् कुलमें जन्म पाता है ( अनु० १०६ । २३ ) ।
  • जो चैत्र मासकी द्वादशी तिथिको दिनरात उपवास करके विष्णु नामसे भगवान्की पूजा करता है, वह मनुष्य पुण्डरीकयज्ञका फल पाता और देवलोकमें जाता है ( अनु० १०९ । ७ ) ।
  • जो ज्येष्ठ मासमें एक ही समय भोजन करता है, वह अनुपम श्रेष्ठ ऐश्वर्य प्राप्त करता है ( अनु० १०६ । २५ ) ।
  • जो माघ मासकी द्वादशी तिथिको दिनरात उपवास करके भगवान् त्रिविक्रमकी पूजा करता है, वह गोमेधयज्ञका फल पाता और अप्सराओंके साथ आनन्द भोगता है ( अनु० १०९ । १९ ) ।
  • ( शेष महीनोंके फल उन-उनके नामके प्रकरणमें देखें । )

  • The Mahābhārata project aims to provide authentic texts from ancient Mahābhārata Sanskrit texts and commentaries to preserve our heritage for our future generation. We welcome views from all to make the content authentic and error free. Contribution both financial and resources are welcome. For feedback or information please write to us at : secretary@sanatanasampatti.in