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मिथिला

  • पूर्वोत्तर भारतका एक प्राचीन जनपद, जहाँ विदेहवंशी क्षत्रियोंका राज्य था । राजा पाण्डुने इस देशपर आक्रमण करके यहाँके क्षत्रिय वीरोंको परास्त किया था ( आदि० ११२ । २८ ) ।
  • ( आधुनिक तिरहुतका ही प्राचीन नाम मिथिला एवं विदेह है । मिथिला शब्द उस जनपदकी राजधानीके लिये भी प्रयुक्त हुआ है; वेदोंके ब्राह्मण-ग्रन्थों और उपनिषदोंमें भी मिथिला एवं विदेहका सादर उल्लेख हुआ है । ) श्रीकृष्ण, अर्जुन और भीमसेन—इन्द्रप्रस्थसे मगधकी जीत समय मिथिलामें भी गये थे ( सभा० २८ । २८ ) ।
  • मिथिलामें ही सुविख्यात धर्मात्माके भक्त धर्मव्याध रहते थे; जिनके पास कौशिक ब्राह्मणको कर्तव्यकी शिक्षा लेनेके लिये एक सतीका भेजा गया था ( वन० २०६ । ४४ से वन० २१६ । ३२ तक ) ।
  • कर्णने दिग्विजयके समय मिथिलाको जीता था ( वन० २५४ । ८ ) ।
  • राजा जनककी पुत्री जगज्जननी सीता मिथिला या विदेह देशके राजा जनककी पुत्री थी । उन्हें विधाताने भगवान् श्रीरामकी प्यारी पत्नी होनेके लिये रचा था ( वन० २७४ । ९ ) ।
  • मिथिलाकी कन्या होनेके कारण ही यशस्विनी सीता 'मैथिली' कहलाती थी ( वन० २७७ । २ ) ।
  • प्राचीन कालमें मिथिलापुरीके एक राजा धर्मध्वज नामसे प्रसिद्ध थे । उनके ब्रह्मर्षिकी कथा सुनकर संन्यासिनी सुलभाके मनमें उनके दर्शनकी इच्छा हुई । उसने प्रचुर जनसमुदायसे भरी हुई रमणीय मिथिलामें पहुँचकर भिक्षा लेनेके बहाने मिथिला-नरेशका दर्शन किया था ( शान्ति० ३२० । ४-१२ ) ।
  • पिताकी आज्ञासे शुकदेवजी मिथिलाके राजा जनकसे धर्मकी निष्ठा और मोक्षका परम आश्रय पूछनेके लिये मिथिलापुरीको गये थे ( शान्ति० ३२५ । ६-७ ) ।

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