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मुचुकुन्द

  • एक प्राचीन राजर्षि, जो यमकी सभामें रहकर सूर्यपुत्र यमकी उपासना करते हैं ( सभा० ८ । २१ ) ।
  • (१) पूर्वकालमें धनाध्यक्ष कुबेर राजर्षि मुचुकुन्दपर प्रसन्न होकर उन्हें सारी पृथ्वी दे रहे थे; परन्तु उन्होंने ग्रहण नहीं किया । वे बोले—'मेरी इच्छा है कि मैं अपने बाहुबलसे उपार्जित राज्यका उपभोग करूँ ।' इससे कुबेर बड़े प्रसन्न और विस्मित हुए । तदनन्तर क्षत्रियधर्ममें तत्पर रहनेवाले मुचुकुन्दने अपने बाहुबलसे प्रायः ही इस पृथ्वीका न्यायपूर्वक शासन किया ( उद्योग० १३२ । ९-११ ) ।
  • एक बार मुचुकुन्दने अपने बलको जाननेके लिये अलकापति कुबेरपर आक्रमण किया । कुबेरके भेजे हुए राक्षसों ने इनकी सेनाको कुचलना आरम्भ किया तब इन्होंने पुरोहितका ध्यान आकृष्ट किया । वसिष्ठजीने तपोबलसे राक्षसोंका संहार कर डाला । इसपर कुबेरके साथ इनका वाद-विवाद हुआ । कुबेरने इन्हें राज्य देना चाहा; पर इन्होंने नहीं लिया । अपने बाहुबलसे उपार्जित राज्यका ही उपभोग किया ( शान्ति० ७४ । ४-२० ) ।
  • परशुरामजीसे शरणागत-रक्षाके विषयमें इनका प्रश्न ( शान्ति० १४३ । ७ ) ।
  • राजा काम्बोजने इन्हें खड्गकी प्राप्ति हुई और इन्होंने महत्तत्त्वकी दीक्षा दी ( शान्ति० १६६ । ७७ ) ।
  • गोदान-महिमाके विषयमें इनका नाम-निर्देश ( अनु० ७६ । २५ ) ।
  • इनके द्वारा मांस-भक्षण-निषेध ( अनु० ११५ । ६१ ) ।
  • सायंकाल-स्मरणीय राजाओंमें भी इनका नाम आया है ( अनु० १६५ । ४४-६० ) ।

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